मेरी दो गज़लें आज की युवा पीढी के लिए -
(एक )
अपनी दीवानगी को गंवाना फ़िज़ूल ,
जुगनुओं रोशनी में नहाना फिजूल ।
किस्त में खुदकुशी इश्क का है चलन ,
इश्क दरिया है पर डूब जाना फ़िज़ूल ।
चांदनी रात में चांद के सामने यूँ -
आपका इसकदर रूठ जाना फ़िज़ूल ।
शर्त है प्यार में प्यार की बात हो ,
प्यार को बेवजह आजमाना फ़िज़ूल ।
लफ्ज़ को बिन तटोले हुये ये '' प्रभात ''
बज़्म में कोई भी गीत गाना फ़िज़ूल ।
(दो )
जो शीशे का मकान रखता है ,
वही पत्थर की ज़ुबान रखता है ।
गुम कर-करके परिन्दों के पर ,
बहोत ऊंची उडान रखता है ।
है जो तहज़ीव से नही वाकिफ ,
घर में गीता - कुरान रखता है ।
खोटा चलता उसका ही सिक्का ,
जो अमन की दुकान रखता है ।
अब तो बेटा भी बाप की खातिर ,
घर के बाहर दलान रखता है ।
कहता है खूबसूरत ग़ज़ल जानिब ,
छुपा करके दीवान रखता है ।
बहुत खराब है '' प्रभात '' ये शराब ,
क्यों मौत का सामान रखता है ?
() रवीन्द्र प्रभात

10 comments:

  1. मैं गजल की तकनीक के विषय में तो नहीं जानता, पर ये दोनों गजलें लगी बहुत अच्छी. पोस्ट के लिये धन्यवाद.

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  2. "बहुत खराब है ''प्रभात'' ये शराब ,
    क्यों मौत का सामान रखता है ?"

    क्या बात है प्रभात, कम शब्दों में सशक्त अभिव्यक्ति -- शास्त्री जे सी फिलिप

    मेरा स्वप्न: सन 2010 तक 50,000 हिन्दी चिट्ठाकार एवं,
    2020 में 50 लाख, एवं 2025 मे एक करोड हिन्दी चिट्ठाकार!!

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  3. बेहद शानदार…।
    कई बाते उठाई हैं और सही तर्क प्रस्तुत करते हुए यह गज़ल और भी अद्भुत बन गई है…।
    कुछ कहना भी नहीं के बराबर ही होगा…।

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  4. है जो तहज़ीव से नही वाकिफ ,
    घर में गीता - कुरान रखता है ।


    --वाह वाह!! क्या बात है. बहुत खूब!

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  5. शर्त है प्यार मे प्यार की बात हो,
    प्यार को बेवजह आजमाना फ़िजूल.

    है जो तहजीव से नही वाकिफ़,
    घर मे गीता-कुरान रखता है.

    गजब, आदमियत की असली कमजोरी खोज निकाली, बधाई.
    आज पहली बार ब्लाग देखा, बहुत सुन्दर

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  6. बहुत खूब!बहुत सुन्दर!!
    पढ़कर अच्छा लगा.

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  7. दोनों ग़ज़लें छू गईं। बलॉग्स में बहर में लिखी हुई ग़ज़लें बहुत कम दिखाई देती हैं।
    आपकी यह ग़ज़लें देख कर बड़ी मसर्रत हुई।

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  8. लफ्ज़ को बिन तटोले हुये ये '' प्रभात ''
    बज़्म में कोई भी गीत गाना फ़िज़ूल ।

    है जो तहज़ीव से नही वाकिफ , घर में गीता - कुरान रखता है

    आपकी दोनो गज़ले बहुत पसंद आयीं ...आनंद आ गया ...ऎसे ही लिखते रहें ..बधाई

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  9. कहता है खूबसूरत ग़ज़ल जानिब ,
    छुपा करके दीवान रखता है ।

    कही ये शेरे आपने अपने बारे मे तो नही कही है.

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