निर्वाचन के घाट पे , भई नेतन की भीड़ !
जनता बन गयी द्रौपदी , खींच रहे हैं चीर !!

गदहा गाये भैरवी , तनिक न लागै लाज !
शाकाहारी बन गए , गिद्ध -गोमायु -बाज !!

पक्ष और प्रतिपक्ष में, ढूंढ रहे सब खोंच !
पांच बरस तक चोंचले, खूब लड़ाए चोंच !!

हरियाली की बात करे , सूख गए जब पात !
जनता भोली देखती , नेता का उत्पात !!

कृष्ण-दु:शासन साथ हैं , अर्जुन बेपरवाह !
कोई मसीहा आये, दिखलाये अब राह !!

() रवीन्द्र प्रभात

19 comments:

  1. अब जो मसीहा भी आएगा न! उहो ससुरा केवल अपना उल्लू सीधा करेगा. बस.

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  2. आज के परिवेश के अनुरूप अत्यंत धारदार व्यंग्य , मजा आ गया पढ़कर ...!

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  3. वोट लूट के ले गई

    कर गई वोटर को सूट

    इसलिए वोटर की

    सिट्टी पिट्टी गुम रहती है।

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  4. नेताओं ने अपनी छवि ऐसी कर ली है कि कोई किसी भले आदमी को नेता कहे तो लगता है गाली दे रहा है , आपने नेताओं की सही तस्वीर खिंची है , बधाईयाँ !

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  5. जनता खुद क्यों नहीं संगठित होकर जनतांत्रिक दल बनाती है?

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  6. Waah ! Waah ! Waah !!!!

    Aanand aa gaya.....

    Vartmaan ke katu yatharth ko itne sundar shbdon me dhala aapne ki wah katu na raha...sundar kavitamayi roop aanandit kar gaya.

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  7. आज के परिवेश पर व्यंग्य अच्छा है , अब इस दिशा में जनता को ही करनी होगी पहल ....!

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  8. नेता की न जात है , न कोई धर्म
    एक बार जीता दो , फिर लूटने में नहीं करेगे कोई शर्म .

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  9. रविंदर जी
    खूबसूरत rachna.........
    neta जी का सही charitr kheencha है आपने

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  10. पक्ष और प्रतिपक्ष में, ढूंढ रहे सब खोंच !
    पांच बरस तक चोंचले, खूब लड़ाए चोंच !!

    हरियाली की बात करे , सूख गए जब पात !
    जनता भोली देखती , नेता का उत्पात !!
    waah satik aur mazedar,badhai:)

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  11. आपने निर्ल्लज लोगो को आईना दिखाया है। आप कारवॉ जारी रखें, हम आपके साथ हैं।

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