........आपका स्वागत है हिन्दी ब्लॉग विश्लेषण-2009 के क्रम -3 में । यद्यपि हम अभी समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण पहलू पर चरचा कर रहे हैं , ऐसे में अभी किसी अन्य विषय को उठाना श्रेयष्कर नही होगा । इसलिए आईये शपथ , इस्तीफा , पुतला दहन के बाद रुख करते हैं राजनीति के चौथे महत्वपूर्ण पहलू "मुद्दे " की ओर....


जी हाँ ! कहा जाता है कि मुद्दों के बिना राजनीति तवायफ का वह गज़रा है , जिसे शाम को पहनो और सुबह में उतार दो । अगर भारत का इतिहास देखें तो कई मौकों और मुद्दों पर हमने ख़ुद को विश्व में दृढ़ता से पेश किया है । लेकिन अब हम भूख, मंहगाई , बेरोजगारी जैसे मुद्दों से लड़ रहे हैं । अज़कल मुद्दे भी महत्वकांक्षी हो गए हैं ।

अब देखिये न ! पानी के दो मुद्दे होते हैं , एक पानी की कमी और दूसरा पानी कि अधिकता । पहले वाले मुद्दे का पानी हैंडपंप में नही आता, कुओं से गायब हो जाता है , नदियों में सिमट जाता है और यदि टैंकर में लदकर किसी मुहल्ले में पहुँच भी जाए तो एक-एक बाल्टी की लिए तलवारें खिंच जाती हैं । दूसरे वाले मुद्दे इससे ज्यादा भयावह है । यह संपूर्ण रूप से एक बड़ी समस्या है । जब भी ऐसी समस्या उत्पन्न होती है , समाज जार-जार होकर रोता है , क्योंकि उनकी अरबों रुपये की मेहनत की कमाई पानी बहा ले जाता है । सैकड़ों लोग , हजारों मवेशी अकाल मौत की मुंह में चले जाते हैं और शो का पटाक्षेप संदेश की साथ होता है - अगले साल फ़िर मिलेंगे !


ऐसे तमाम मुद्दों से रूबरू होने के लिए आपको मेरे साथ चलना होगा बिहार जहाँ के श्री सत्येन्द्र प्रताप ने अपने ब्लॉग जिंदगी के रंग पर दिनांक ०७.०८.२००९ को अपने आलेख .... कोसी की अजब कहानी में ऐसी तमाम समस्यायों का जिक्र किया है जिसको पढ़ने के बाद बरबस आपके मुंह से ये शब्द निकल जायेंगे कि क्या सचमुच हमारे देश में ऐसी भी जगह है जहाँ के लोग पानी की अधिकता से भी मरते हैं और पानी न होने के कारण भी ।
जी हाँ वह क्षेत्र है बिहार में सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, अररिया, कटिहार और पूर्णिया, जहाँ इस साल सूखे पड़े हैं। बाढ़ ने पिछले साल इन इलाकों को डुबाया था, नहर की व्यवस्था ध्वस्त होने से खेतों में पानी नहीं पहुंच रहा है। मानसूनी बारिश न होना भी कोढ़ में खाज बन गया । सत्येन्द्र प्रताप के अलावा भी कई ब्लोगर हैं जिन्होंने कोसी की कहानी लिखी है और बताया है कि कैसे रहत कार्य लूटपाट से मुक्त नही है । कई डूबते को नही मिल रहा बैंक का सहारा और कैसे मधेपुरा के २०० साल पुराने मुरली बाज़ार को लील गयी कोसी नदी .....आदि । ये हुयी न कोसी की कहानी के अलोक में मुद्दे की बात । जून से लेकर अक्टूबर तक चलने वाले शो में हर साल लाखों लोग बेघर हो जाते हैं। दाने-दाने और दो घूँट पानी को बड़ी आवादी तरस जाती है यह उत्तर और पूर्वी बिहार की जनता की कहानी है जो सैकड़ों साल से सच्ची दर्दनाक और भयावह फ़िल्म तबाही और नेताओं के खोखले वादों को झेलती चली आरही है .... !
ऐसा नही कि श्री सत्येन्द्र अपने ब्लॉग पर केवल स्थानीय मुद्दे ही उठाते है , अपितु राष्ट्रिय मुद्दों को भी बड़ी विनम्रता से रखने में उन्हें महारत हासिल है । दिनांक ०४.०६.२००९ के अपने एक और महत्वपूर्ण पोस्ट यह कैसा दलित सम्मान? में श्री सत्येन्द्र ने दलित होने और दलित न होने से जुड़े तमाम पहलुओ को सामने रखा है दलित महिला नेत्री मीरा कुमार के बहाने । सत्येन्द्र कहते हैं, कि-"बड़ा दुख होता है कि मीरा कुमार के लोकसभा अध्यक्ष बनने के बाद सत्तासीन पार्टी कहते फिर रही है कि दलित को अध्यक्ष बना दिया। दलित और उनके जाति के संबोधन को भारतीय समाज में गालियों की तरह ही लिया जाता है। अब मीरा को इतनी बार दलित कहा जा रहा है कि वे इस एहसान से दब जाएंगी कि ऐसा लगता है कि बगैर किसी योग्यता के दलित होने के चलते ही उन्हें यह पद मिल गया है। हालांकि उनका पिछला इतिहास देखा जाए तो हर मौके पर उन्होंने अपनी योग्यता साबित की है।"
पानी होने और पानी न होने , दलित होने और दलित न होने जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों से भरा-पड़ा है यह ब्लॉग । कुल मिलकर यह ब्लॉग ज्वलंत मुद्दों का जीवंत आईना है । जिंदगी के रंग में रंगने हेतु एक बार अवश्य जाईये ब्लॉग जिंदगी के रंग पर और बताईये कैसा है?
तबतक हम लेते हैं एक छोटा सा विराम ।

12 comments:

  1. आपके मेहनत भरे इस महत्वपूर्ण कार्य को मेरा प्रणाम !

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  2. बहुत ही अच्छे चिट्ठो के बारे में चर्चा के लिए आभार .

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  3. नियमित पढ़ रहा हूँ ब्लॉग चर्चा,बहुत ही मेहनत और शोध कर विविध ब्‍लॉगों के बारे में जानकारी दे रहे हैं आप। खासकर नए ब्‍लॉगरों के लिए आपकी यह श्रृंखला निर्देशिका का काम कर सकती है। सराहनीय प्रयास।

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  4. बेहतरीन विश्लेषण!! बधाई-जारी रहें.

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  5. बहुत सुंदर विश्‍लेषण रहा यह आपका .. इस ब्‍लाग को मैने भी हमेशा पढा है .. अब अगली कडी का इंतजार रहेगा !!

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  6. जिन्दगी के रंग बहुत उम्दा ब्लॉग है सत्येन्द्र जी का। मेरे फीड रीडर का अंग है।

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  7. आपकी इस श्रृंखला को पढ़े जा रहा हूँ । सत्येन्द्र जी के ब्लॉग तक तो आपने ही पहुँचाया । आभार ।

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  8. सत्येन्द्र प्रताप जी के ब्लौग से परिचय करवाने का शुक्रिया।

    इतनी मेहनत से की गयी समीक्षायें आपकी धीरे-धीरे पढ़ रहा हूं। इस लगन और श्रद्धा को नमन!

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  9. रवीन्द्र जी आपको बहुत बहुत साधुवाद इस समीक्षा के लिये।

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  10. सत्येन्द्र जी के ब्लॉग तक पहुचाने का शुक्रिया जी!

    बहुत बहुत साधुवाद!!!

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