..... पिछले क्रम में मुद्दों पर आधारित श्री सत्येन्द्र प्रताप के ब्लॉग की चर्चा हुयी थी ।आज हम एक और मुद्दे पर आधारित ब्लॉग को लेकर आपके सामने आए हैं, जो आदिवासीजन से जुडे मुद्दों को प्राथमिकता देता है , जिन्हें समाज के हाशिये से भी नीचे धकेलते रहने के जान-अनजाने प्रयास किये जाते रहे हैं। ब्लॉग का नाम है " आदिवासी जगत " और ब्लॉगर हैं -श्री हरि राम मीणा ।

यह ब्लॉग आदिवासी समाज को लेकर फ़ैली भ्रांतियों के निराकरण और उनके कठोर यथार्थ को तलाशने का विनम्र प्रयास है । दिनांक २२.०५.२००९ को प्रकाशित अपने आलेख आदिवासी संस्कृति-वर्तमान चुनौतियों का उपलब्ध मोर्चा में श्री मीणा कहते हैं, की -"आदिवासी संस्कृति को समझने के लिए ‘प्रकृति’ व ‘संस्कृति’ के अन्तर व सम्बन्धों पर विचार करते हुए बात की शुरुआत की जा सकती है। प्रकृति दृश्यमान खगोलीय व भौगोलिक तत्त्वों की सृष्टि है जो नैसर्गिक है। इसका स्वरूप मौलिक भी है और परिवर्तनशील भी। सुविधा के लिए कहा जा सकता है कि यह प्राणी जगत से पृथक परिवेश है जिसमें प्रकृति के जड़ व चेतन दोनों तत्त्वों का अस्तित्त्व होता है।"

श्री मीणा आदिवासी समाज के ज्ञान भंडार को डिजिटल शब्दों के साथ साईबर संसार में फैलाना चाहते हैं । कहते हैं की आदिवासी गल्प, स्वप्न, मुहावरे अदि की जानकारियाँ आदिवासियों की नई पीढी और गैर आदिवासियों को भी मिलनी चाहिए । पेशे से सीनियर पुलिस ऑफिसर श्री मीना ग्लोब्लायिजेसन को लेकर सवाल करते हैं । पूछते हैं की ग्लोबलायिजेसन के लाभ यदि आम जन के लिए है तो उनके जीवन का हिस्सा कब बनेंगे ?यह प्रश्न अपने आप में एक वेहद गंभीर बहस को जन्म देता है । यदि आप बाद-विवाद-संवाद में अभिरुचि रखते हैं तो इस ब्लॉग पर विचरण कर सकते हैं , क्योंकि यह ब्लॉग आदिवासी- विमर्श के बहाने गंभीर वहस को जन्म देता है ।


......अब आईये उस ब्लॉग की ओर रुख करते हैं जो एक ऐसे ब्लोगर की यादों को अपने आगोश में समेटे हुए है जिसकी कानपुर से कुबैत तक की यात्रा में कहीं भी माटी की गंध महसूस की जा सकती है । अपने ब्लॉग मेरा पन्ना में कानपुर के जीतू भाई कुवैत जाकर भी कानपुर को ही जीते हैं।वतन से दूर, वतन की बातें, एक हिन्दुस्तानी की जुबां से…अपनी बोली में.... !

दिनांक ०९.०९.२००९ को इस ब्लॉग के पाँच साल पूरे हो गए। इंटरनेट के चालीस साल होने के इस महीने में हिंदी के एक ब्लॉग का पांच साल हो जाना कम बड़ी बात नहीं है।

मेरा पन्ना के मोहल्ला पुराण में छपे लेखों के जरिये कानपुर की एक दिलचस्प तस्वीर बनती रहती है। जीतू बताते हैं कि कैसे कॉमिक्स पढ़ने के लिए पी रोड पर राजाराम बुकस्टॉल और राधा मोहन मार्केट में मनोरंजन संग्रहालय के ग्राहक बने। फिर कहानी आगे बढ़ती हुई बताती है कि कॉमिक्स बुक्स किराये पर देने के लिए दुकानदारों ने ग्राहकों का चेन बनाने में पाठकों का ही इस्तेमाल किया। नया ग्राहक लाने वाले को दस पैसे में वहीं बैठ कर पढ़ने की इजाजत मिलती थी। नए ग्राहकों से बीस पैसे प्रति कॉमिक्स की पढ़ाई लेता था।

इसके अलावा वो फुर्सत में छतियाना एक दिलचस्प लेख है। अपार्टमेंट के इस दौर में छतों का उपयोग पेंट हाउस या फिर पानी की टंकी के आरामगाह के रूप में ही रहा है। अब छतों पर मानव आबादी अपने अनुभवों का निर्माण विकास नहीं करती है। महानगरों के अखबार बताते हैं कि फलां ने छत से कूद कर आत्महत्या कर ली। कभी छत जिंदगी के असली केंद्र हुआ करते थे। तभी तो जीतू भाई ने छत पर की गई शरारतों को छतियाना लिखा ।

इस ब्लॉग पर प्रकाशित दिलचस्प किस्सों में बहुत कुछ दिखता है। 20-30 साल पहले के सामाजिक संबंध, शहर का ढांचा आदि आदि। ब्लॉग और ब्लोगर से संबंधित सबसे सुखद पहलू तो यह है की इन्होंने अपने लिए कभी ब्लॉगिंग नहीं की। गूगल एडसेंस से पैसे मिले तो बाकी ब्लागरों को भी बताया कि ब्लगिंग से पैसा कैसे कमाया जा सकता है। ब्लगिंग से जुड़ी तकनीकी जानकारी देने वाले कई लेख मेरा पन्ना पर मिलेंगे।

इस वेहद खुबसूरत और सारगर्भित ब्लॉग को दीर्घायु जीवन की मंगल कामना...........!
इस क्रम में बस इतना ही, मिलते हैं एक छोटे से विराम के बाद ...!

9 comments:

  1. सटीक...जीतू भाई को सम्मलित देख खुशी हुई.

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  2. वास्‍तव में आपने बहुत मेहनत किया है .. नए लिंक भी मिल रहे हैं हमें !!

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  3. जैसे-जैसे यह चिट्ठा चर्चा क्रम-दर -क्रम आगे बढ़ रही है , रोमांच पैदा कर रही है ।बढ़िया विश्लेषण...

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  4. बहुत ही अच्छे चिट्ठो के बारे में चर्चा के लिए आभार .

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  5. वास्‍तव में यह चर्चा रोमांच पैदा कर रही है...

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  6. बेहतर काम, बेहतर विश्लेषण । आभर

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  7. रवीन्द्र जी इस गहन गम्भीर समीक्षा के लिये सर्वप्रथम आप्को बधाई । हरिराम मीणा जी से तो साहित्य जगत से परिचित हूँ ही । उन्हे भी बधाई साथ ही मेरा पन्ना के पाँच साल पूरे होने पर शुभकामनायें ।

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  8. बहुत सूक्ष्म-अवलोकन किया है आपने महत्वपूर्ण ब्लॉगों का।
    पुनश्च मीणा जी के ब्लॉग तक का रास्ता दिखाने का शुक्रिया !!
    आभार सहित

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