आज के इस प्रारूप में हम चर्चा कर रहे हैं वर्ष-२००९ में हिन्दी ब्लोगिंग के सप्तर्षिँ यानी वर्ष के सात आदर्श चिट्ठाकारों के बारे में


कहा जाता है कि हर क्षेत्र में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके विचार महान होते है और वह अपने विचारों के बल पर कुछ नया करने की चाहत रखता है , कोई सफल हो जाता है तो कोई असफलजो सफल होता है उसकी हर जगह चर्चा होती है और जो असफल हो जाता है वह चर्चा के नए बहानों में शामिल हो जाता हैमैंने अपने विश्लेषण में किसी विशेष विचारधारा को कभी महत्व नही दिया क्योंकि जो अच्छा है वह अच्छा है और उसकी चर्चा होनी चाहिए

आज के इस विश्लेषण में हम केवल सात चिट्ठाकारो की बात करेंगे जिनका अवदान हिन्दी चिट्ठाकारी में अहम् है और वर्ष -२००९ में अपनी खास विशेषताओं के कारण लगातार चार्चा में रहे हैंसाहित्यिक-सांस्कृतिक -सामाजिक - विज्ञानं - कला - अध्यात्म और सदभावनात्मक लेखन में अपनी खास शैली के लिए प्रसिद्द चिट्ठाकारो में लोकप्रिय एक-एक चिट्ठाकार का चयन किया गया है


इस विश्लेषण के अंतर्गत जिन सात चिट्ठाकारों का चयन किया गया है ,उसमें भाषा-कथ्य और शिल्प की दृष्टि से उत्कृष्ट लेखन के लिए श्री प्रमोद सिंह ( चिट्ठा - अजदक )व्यंग्य लेखन के लिए श्री अविनाश वाचस्पति (चिट्ठा - की बोर्ड का खटरागी ) लोक -कला संस्कृति के लिए श्री विमल वर्मा ( चिटठा- ठुमरी ) सामाजिक जागरूकता से संबंधित लेखन के लिए श्री प्रवीण त्रिवेदी ( चिटठा- प्राईमरी का मास्टर ) विज्ञानं के लिए श्री अरविन्द मिश्र ( चिटठा - साईं ब्लॉग ) । अभिकल्पना और वेब-अनुप्रयोगों के हिन्दीकरण के लिए श्री संजय बेगाणी ( चिटठा - जोग लिखी ) और सदभावनात्मक लेखन के लिए श्री महेंद्र मिश्रा ( चिट्ठा - समयचक्र ) का उल्लेख किया जाना प्रासंगिक प्रतीत हो रहा हैउल्लेखनीय है कि ये सातों चिट्ठाकार केवल चिट्ठा से ही नहीं अपने-अपने क्षेत्र में सार्थक गतिविधियों के लिए भी जाने जाते है और कई मायनों में अनेक चिट्ठाकारों के लिए प्रेरक की भूमिका निभाते हैं



वर्ष के सात आदर्श चिट्ठाकारों में जिनका नाम बड़े अदब और सम्मान से लिया जाना चाहिए वह हैं श्री प्रमोद सिंह जिनके सम्मोहक लेखन से सुस्सजित है हिन्दी का एक महत्वपूर्ण ब्लॉग -अजदक



पुष्टि हेतु निम्नलिखित आधार है -

() चिट्ठाकार द्वारा हिन्दी चिट्ठाकारी को अलग प्रयोगवादी पहचान देने का महत्वपूर्ण कार्य किया है

() कथ्य और शिल्प की दृष्टि से हिन्दी का सबसे चमत्कारिक चिट्ठा

() कथावस्तु,प्रगतिशील चिंतन धारा , विषय की विविधता और शिल्प का आकर्षण इस चिट्ठे की सबसे बड़ी विशेषता है

() यह चिट्ठा अलेक्सा के सर्वाधिक लोकप्रिय हिन्दी पृष्ठों में शीर्ष पर है

() इस चिट्ठे का सम्मानित पहलू है गंभीर लेखन और प्रमाणिक तथ्य


वर्ष के दूसरे आदर्श ब्लोगर हैं श्री अविनाश वाचस्पति श्री अविनाश जिन विषयों पर लिखते हैं उसकी व्यापकता तारीफे काबिल है।
सच तो यह है कि चिट्ठाजगत में शायद ही कोई व्यक्ति हो जिस ने अविनाश वाचस्पति का नाम न सुना हो। इनके बगीची, तेताला, झकाझक टाइम्‍स, नुक्‍कड़ और अविनाश वाचस्‍पति नाम से पाँच हिन्‍दी ब्‍लॉग व्‍यंग्‍य के लिए काफी चर्चित हैं।
उन्होंने लगभग सभी साहित्यिक विधाओं में लेखन किया है परंतु व्यंग्य, कविता एवं फ़िल्म पत्रकारिता में प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। उनकी रचनाएँ भारत तथा विदेश से प्रकाशित लगभग सभी प्रमुख हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं तथा उनकी कविताएँ चर्चित काव्य संकलनों में संकलित की गई हैं। वे हरियाणवी फ़ीचर फ़िल्मों 'गुलाबो', 'छोटी साली' और 'ज़र, जोरू और ज़मीन' में प्रचार और जन-संपर्क तथा नेत्रदान पर बनी हिंदी टेली फ़िल्म 'ज्योति संकल्प' में सहायक निर्देशक रहे हैं। वे राष्ट्रभाषा नव-साहित्यकार परिषद और हरियाणवी फ़िल्म विकास परिषद के संस्थापकों में भी हैं। सामयिक साहित्यकार संगठन, दिल्ली तथा साहित्य कला भारती, दिल्ली में उपाध्यक्ष और केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद के शाखा मंत्री पद पर भी कार्य कर चुके अविनाश संप्रति इसके आजीवन सदस्य हैं।
हिन्दी चिट्ठाकारी में श्री अविनाश के अवदान को दृष्टिगत रखते हुए और उनके धारदार व्यंग्य को आत्मसात कराने के बाद परिकल्पना के विश्लेषण में उन्हें वर्ष के आदर्श चिट्ठाकारों में शुमार किया है । हम उनके उज्जवल भविष्य कि कमाना करते हैं ।

कहा गया है, कि लोकगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा है , जिससे मिली है हमारे देश को वैश्विक सांस्कृतिक पहचान । लोकगीत की बात हो और ठुमरी की बात न हो तो शायद बेमानी हो , इसलिए इस क्रम में जिस तीसरे ब्लोगर को स्थान दिया गया है , वे हैं श्री विमल वर्मा जो अपने ब्लॉग के मध्यम से पूरे वर्ष तक लगातार अपनी महान विरासत को बचाते-संभालते रहे । यह ब्लॉग लोकगीत की एक ऐसी छोटी सी दुनिया से हमें परिचय कराता रहा, जिसे जानने-परखने के बाद यकीं मानिए मेरे होठों से फूट पड़े ये शब्द, कि " वाह! क्या ब्लॉग है .......!"

इस चिट्ठाकार के द्वारा जो कुछ भी प्रस्तुत किया गया , वह हमारी लोक संस्कृति को आयामित करने के लिए काफी है । लोकगीत और लोकरंग को जीवंत रखते हुए अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज कराने वाले चिट्ठों की श्रेणी में वर्ष-२००९ में शीर्ष पर रहा है- ठुमरी , जिसपर आने के बाद महसूस होता है की हमारे पास सचमुच एक विशाल सांस्कृतिक पहचान है और वह है गीतों की परम्परा । इसी परम्परा को जीवंत करता हुआ दिखाई देता है यह ब्लॉग। अपने आप में अद्वितीय और अनूठा ।


वर्ष-२००९ के आदर्श चिट्ठाकारों की श्रेणी में अगला नाम है श्री प्रवीण त्रिवेदी का । प्रवीण हिन्दी चिट्ठाकारी में एक ऐसा क्रन्तिकारी नाम है , जिन्होंने आदर्शों और वास्तविकताओं के मध्य एक प्राथमिक शिक्षक के श्यामपट पर अंकित समाज के कुछ अनछुए प्रश्नों को अपने ब्लॉग के मध्यम से प्रस्तुत किया है जो हिन्दी चिट्ठाकारी के लिए किसी आदर्ष से कम नही है । जैसा कि हम सभी को विदित है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था की नींब और हमारे व्यापक सामाजिक सरोकारों को नया आयाम देने हेतु सुदृढ़ आधार रहा है प्राईमरी स्कूल । बस इसी बात को प्रमाणित करने की वेचैनी दिखती है उत्तर प्रदेश के इस छोटे से शहर के इस ब्लोगर में।
शिक्षा के विभिन्न आयामों से गुजरते हुए यह ब्लॉग कभी- कभी सार्थक वहस को भी जन्म देता दिखाई देता है। प्रवीण कहते हैं, कि प्राईमरी के मास्टर की सबसे बड़ी समस्या है वह ख़ुद को अपडेट नही रख पाता , वहीं जनमानस को चाहिए की प्राईमरी मास्टर के प्रति अपने पूर्वाग्रहों को अपने मन से हटा दें…। यह ब्लोगर वर्ष-२००९ में लगातार पोस्ट-दर-पोस्ट मुखर हुआ है और कई गंभीर मसलों को उजागर कराने का महत्वपूर्ण काम किया है ।
इस क्रम के अगले आदर्श ब्लोगर हैं श्री अरविन्द मिश्र, जिनके ब्लॉग का नाम है - साई ब्लॉग । चौंकिए मत, यह कोई साईं कृपा से चलने वाला ब्लॉग नहीं, साईंस से साई लेकर साईब्लॉग बना है। सांई ब्लॉग हिन्दी में विज्ञान पर लोकप्रिय और अरविन्द मिश्रा के निजी लेखों का संग्राहालय है , जो पूरी दृढ़ता के साथ आस्था और विज्ञान के सबालों के बीच लड़ता दिखाई देता है । इस सन्दर्भ में ब्लोगर का कहना है, कि उन्होंने जेनेटिक्स की दुनिया की नवीनतम खोज जीनोग्राफी के जांच का फायदा उठाया है।
श्री अरविन्द के इस ब्लॉग में जो कुछ भी अंकित है वह विचित्र किंतु सत्य है । यानी विज्ञानं की अजीबो-गरीब बातों और रहस्यों से भरा- पड़ा है यह ब्लॉग । सबसे महत्वपूर्ण और प्रमाणिक तथ्य तो यह है की चिट्ठाकार के द्वारा प्रस्तुत कई बात कई मसलों से गुजरती हुयी पाठक के मन में जिज्ञासा की अजीब प्यास छोड़ जाता है । पाठक काफ़ी देर तक बौद्धिक व्यायाम करते हुए सवालों के मकरजाले में उलझता दिखाई देता है । यह ब्लॉग पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष ज्यादा मुखर दिखा है । हिन्दी को एक अति महत्वपूर्ण ब्लॉग देने के लिए इस आदर्श ब्लोगर को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं .....!
अब जिस आदर्श ब्लोगर की हम चर्चा करने जा रहे हैं वे हैं श्री संजय वेगाणी । श्री संजय वेगाणी का चिटठा है - जोगलिखी । यह हिन्दी चिट्ठा, आस-पास की घटनाओं पर सारगर्भित टिप्पणी के लिए जाना जाता है । कम शब्दों में ज्यादा और प्रासंगिक बातें करना इस ब्लोगर की सबसे बड़ी विशेषता है । मेरा मानना है कि इस तरह का चिटठा आज की व्यस्त जिंदगी में ज्यादा से ज्यादा जानने के उत्सुकता के दृष्टिगत काफी महत्वपूर्ण है । इस चिट्ठे और चिट्ठाकार को मेरी अनंत आत्मिक शुभकामनाएं ।

इस क्रम के सातवें किंतु अतिमहत्वपूर्ण चिट्ठाकार हैं - श्री महेंद्र मिश्र । श्री मिश्र के बारे में मैं यही कह सकता हूँ कि यह चिट्ठाकार हिन्दी ब्लोगिंग में सादगी और सदभावना के प्रतिमूर्ति हैं । इनका कद इनके चिठ्ठे से कहीं ऊपर है । वैसे दो चिट्ठे क्रमश: समयचक्र और निरन्तर इनके द्वारा प्रकाशित चिट्ठों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण चिटठा है, किंतु इनकी व्यापक सक्रियता अन्य आंचलिक और सामूहिक चिट्ठों में भी दृष्टिगोचर होती है ।
वर्ष- २००९ में इस चिट्ठाकार के द्वारा सामूहिक रूप से कतिपय चिट्ठों का जिक्र किया गया है और चिट्ठी चर्चा के माध्यम से रचनात्मक आन्दोलन की प्रस्तावना की गई है , जो प्रशंसनीय ही नही सराहनीय भी है ।
यह चर्चा अभी जारी है, मिलते हैं एक छोटे से विराम के बाद ..../

20 comments:

  1. रवीन्द्रजी ...सादर...नमस्कार....

    आपका मोबाइल नंबर नहीं लग रहा है ..... कृपया जल्दी से संपर्क करिए....

    सादर

    महफूज़...

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  2. sabhi saat chitthaakaaon ko bahut bahut haardik badhaai aur abhinandan !

    behtareen kaarya ka swaagat hona hi chaahiye

    man prasann ho gaya

    chyankartaon ko saadar vandan aur saadhuvaad !

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  3. वर्ष - २००९ के सप्तर्षि यानि वर्ष के सात आदर्श चिट्ठाकारों को मेरी ओर से हार्दिक बधाईयाँ ....!

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  4. सचमुच अपने-अपने क्षेत्र में आदर्श हैं ये ब्लोगर , वर्ष के सप्तर्षि
    को मेरी मंगल कामनाएं !

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  5. बहुत सजग चयन. सप्तऋषियों को बहुत बधाई. :)

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  6. सभी आदर्श चिट्ठाकारों को बधाईयाँ !

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  7. ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
    ब्लोगचर्चा मुन्ना भाई की
    ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★

    ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
    हम अपने चिठ्ठो को ढूढ ते रहगऎ.
    सभी आदर्श चिट्ठाकारों को बधाईयाँ
    ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥

    निचे चटका लगाऎ
    ब्लोगचर्चा मुन्ना भाई की
    हे प्रभु यह तेरापन्थ
    मुम्बई-टाईगर
    अजीब पेड
    इस महिला ब्लोगर को पहचाने

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  8. sabhi pandit hain..... pandit matlab brahman nahin vidwaan !!!

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  9. रवीन्द्र जी किन शब्दों में कृतज्ञता व्यक्त करून -आपने तो मुझे रुला भी दिया !मेरे अन्यान्य ब्लागों में साईब्लाग ही मुझे प्रिय है और इसीलिये ही तो मैं यहाँ आया था !आपकी पारखी नजर को सलाम !

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  10. सभी को बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं. और आपका परिश्रम देखकर तो बस आपको प्रणाम करता हूं. काबिले तारीफ़ कार्य है यह. बहुत बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  11. निश्चय ही यह सात ब्लॉगर उल्लेखनीय़ अवदान के लिये जाने जानेवाले महत्वपूर्ण नाम हैं । इनके कार्य के सही मूल्यांकन और इनके चयन के लिये कोटिशः आभार ।

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  12. सभी अपने आपने क्षेत्रो के महारथी ब्‍लागर है, कोई दो राय नही।

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  13. उक्त सभी सात ब्लॉग निर्विवाद रूप से उत्कृष्ट हैं। आपके चयन को साधुवाद!

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  14. हिन्‍दी ब्‍लॉग विश्‍ल्‍ेषण की इस श्रृंखला में की गयी मेहनत आपके पोस्‍टों में साफ दिखाई देती है .. ब्‍लॉग जगत के एक एक चिट्ठे को चुनकर निकालकर हमारे सामने रख रहे हैं आप .. आपको बधाई और शुभकामनाएं !!

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  15. इन सभी को पढता रहा हूँ. इतने विस्तृत और सुचारू ब्लॉग-विश्लेषण के लिए आपको बधाई और चुने गए ब्लोगर्स को शुभकामनाएं!

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आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

 
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