जिस प्रकार जीवन के चार आयाम होते हैं उसी प्रकार हिंदी चिट्ठाकारी की भी चार सीढियां है जिससे गुजरकर हिंदी चिट्ठाकारी संपूर्ण होती है..

प्रथम सीढ़ी - भावना
जिससे दिखती है लक्ष्य की संभावना ,
संभावना से प्रष्फुटित होता है विश्वास ,
विश्वास से दृढ़ता , दृढ़ता से प्रयास ....!

यानी दूसरी सीढ़ी - प्रयास
प्रयास परिणाम कां शोध है
यह तभी सार्थक है जब कर्त्तव्य-बोध है

यानी तीसरी सीढ़ी - कर्त्तव्य
कर्त्तव्य से होता है समन्वय आसान
और यही है उत्तरदायित्व का प्रत्यक्ष प्रमाण

यानी चौथी सीढ़ी है - उत्तरदायित्व
जिसमें न भय , न भ्रम , न भ्रान्ति होती है
केवल स्वावलंबन के साथ जीवन में शांति होती है



स्मृति वर्ष -२००९ की आखिरी संध्या पर
मेरी शुभकामना है कि - नूतन वर्ष-२०१० में -


" स्वावलंबन आपके घर को अपना निवास स्थान बनाये ।
और आपका जीवन -- शांति, सुख, संतुष्टि से भर जाये । ।"

नव वर्ष मंगलमय हो

शुभेच्छु-
रवीन्द्र प्रभात

18 comments:

  1. अति सुन्दर सन्देश!

    नववर्ष आपके लिये मंगलमय हो!

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  2. कामना है ,नये साल में उर्जा के साथ चिट्ठेकारी करें ।
    सप्रेम,

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  3. नये वर्ष की शुभकामनायें।

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  4. नववर्ष आपके लिये मंगलमय हो!

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  5. नवल धवल सुरज से आलोकित,हो घर आंगन परिवार।
    नुतन वर्ष 2010 की आपको अशेष शुभकामनाएं अपार॥

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  6. इतने निराले ढ़ंग से बात कहने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
    आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  7. नव वर्ष आपको और आपके परिवार को मंगलमय हो!

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  8. नववर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाये.

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  9. नववर्ष मंगलमय हो!
    आप के चारों सूत्र याद रखे जाएँगे!

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  10. वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाने का संकल्प लें और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

    - यही हिंदी चिट्ठाजगत और हिन्दी की सच्ची सेवा है।-

    नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाएँ!

    समीर लाल
    उड़न तश्तरी

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  11. बहुत बढिया कहा .. आपके और आपके परिवार के लिए नववर्ष मंगलमय हो !!

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  12. आपको और आपके परिवार को नव वर्ष मंगलमय हो!

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  13. आपको भी नव-वर्ष की मंगलमौ शुभकामनायें...रविन्द्र जी। आपका ये प्रयास ब्लौगिंग-इतिहास में गिना जायेगा!
    अप्रतिम प्रयास...

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  14. हैप्पी न्यू इयर -२०१०

    नये साल में रामजी, इतनी-सी फरियाद,
    बना रहे ये आदमी, बना रहे संवाद।
    नये साल में रामजी, बना रहे ये भाव,
    डूबे ना हरदम, रहे पानी ऊपर नाव ।
    नये साल में रामजी, इतना रखना ख्याल,
    पांव ना काटे रास्ता, गिरे न सिर पर डाल।
    नये साल में रामजी, करना बेड़ा पार,


    क्या-क्या चाहते हैं, क्या-क्या सोचते हैं, क्या फरियाद है हमारी हमारे राम से - कवि ’कैलाश गौतम’ की रचना http://ramyantar.blogspot.com/2010/01/blog-post.html

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