मैं समय हूँ !

मैंने देखे हैं हिंदी ब्लॉगजगत में कई उतार-चढ़ाव , किन्तु एक ऐसा चिट्ठाकार भी देखा है जो अंगद के पाँव की तरह जहां जम गया वहां जम गया




उसका व्यंग्य जहां दिल की गहराईयों में जाकर गुदगुदाता है वहीं कविता अपनी संवेदनात्मक अभिव्यक्ति के कारण चिंतन के लिए विवश कर देती है .उसकी लोकप्रियता का पैमाना यह है कि हर नया चिट्ठाकार उसे अपनी प्रेरणा का प्रकाश पुंज महसूस करता है,नाम है समीर लाल समीर

आईये इन्हीं से पूछते हैं इनके ब्लॉग उड़न तश्तरी के पोपुलर होने का राज - यहाँ किलिक करें


त्सव जारी है मिलते हैं एक अल्प विराम यानी अपराह्न ०२ बजे परिकल्पना पर

5 comments:

  1. समीर लाल जी सिर्फ अच्छा लिखते ही नहीं,अच्छी टिप्पणियां भी करते हैं जो उनके गंभीर अध्येता होने का प्रमाण है। उडनतश्तरी की उड़ान और ऊंची हो!

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  2. समीर लाल जी एक अविश्वसनीय किन्तु सच टाईप के महाविभूति हो चले हैं

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  3. अरविंद जी के स्नेह से अभिभूत हुआ!! :)

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  4. ाभिभूत होती हूँ समीर जी कर्म्निष्ठा देख कर हैरान भी। यही नही वो लिखने पढने और टिप्पणी देने के इलावा सब के सम्पर्क मे भी रहते हैं और दुख सुख मे हाल भी पूछते हैं। शायद 24 घन्टे मे कोई इतना काम नही कर सकता जितना वो कर लेते हैं। उन्हें शुभकामनायें। आभार्

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