मैं समय हूँ !



मैंने इसी गली में  ग़ज़ल कहते  सुना है ग़ालिब को....मीर को ....दुष्यंत की गज़लें भी इन्हीं गलियों से गुजरती हुई परवान चढ़ी थी  .....अब तो हमारे देश में हर कोई ग़ज़ल कहता है ....आप भी,हम भी और ये भी ....!



हिंदी ब्लॉग पर मैंने देखे है -

गजलों मुक्तकों और कविताओं का नायाब गुलदश्ता महक की......ग़ज़लों का गुलदश्ता अर्श की.....युगविमर्श की......महाकाव्य की......कोलकाता के मीत की...... "डॉ. चन्द्रकुमार जैन " की....दिल्ली के मीत की......"दिशाएँ "की......पंकज सुबीर  के सुबीर संवाद सेवा की.....वरिष्ठ चिट्ठाकार और सृजन शिल्पी  रवि रतलामी  का ब्लॉग “ रचनाकार “ की......वृहद् व्यक्तित्व के मालिक और सुप्रसिद्ध चिट्ठाकार  समीर  के ब्लॉग “ उड़न तश्तरी “ की....... " महावीर" " नीरज " "विचारों की जमीं" "सफर " " इक शायर अंजाना सा…" "भावनायें... " गौतम राजरिशी, निर्मला कपिला  आदि की.....।
 
आज हम हिंदी ब्लॉगजगत के कुछ चुनिन्दा ग़ज़लकारों से आपको मिलवाने जा रहे हैं , किन्तु उससे पहले आईये हिंदी ग़ज़ल की विकास यात्रा पर एक नजर डालते हैं.....यहाँ किलिक करें






जारी है उत्सव मिलते हैं एक विराम के बाद

2 comments:

  1. तारीफें जितनी की जाए कम है ...इस आयोजन से निश्चय ही ब्लॉग जगत धन्य हो गया है ....

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