मैं समय हूँ !

आज फिर उपस्थित हूँ परिकल्पना ब्लॉग उत्सव में ...
ग्यारहवें दिन

मुझे याद आ रहा  है परिकल्पना पर जब ११ मार्च को  पहली बार आया था वह पोस्ट -
ब्लॉग उत्सव-२०१० की परिकल्पना

तब मैंने सोचा था कि अंतरजाल पर उत्सव ?
पागल तो नहीं हो गया कैसे कर पायेगा वह ?

आज ब्लॉग उत्सव की सफलता देखकर मृदुला गर्ग की वह पंक्तियाँ याद आ गयी-
" कि मैंने अपने होने का ऐलान किया और -
लोगों की नींद उड़न छू हो गयी ...!"

प्रख्यात चित्रकार इमरोज ने कहा - किसी उपनिषद् की तरह है यह परिकल्पना तो कविवर पन्त की
बेटी ने कहा -परिकल्पना ने त्रिकाल दर्शन करा दिए ....आज आर्ट ऑफ लिविंग  के सुमन सिन्हा का कहना है कि - " संभावना हो तुम !" 











उनका कहना है -

"परिकल्पना उत्सव को मैं शुभकामना नहीं दूंगा ,
आशीर्वाद दूंगा ,
तुम्हारे पंख कभी आश्रित नहीं हों .


मैं जानता हूँ ,
तुम सब ऊँची से ऊँची मंजिल से भी ऊँचे जाओगे ,
क्यूंकि ,
तुम में , मैं एक सम्भावना देख रहा हूँ ,
तुम्हारे अन्दर स्वाभिमान देख रहा हूँ ,
खुद में विश्वास ,
निर्भीक मन ,
सब के वास्ते श्रद्धा देख रहा हूँ .


और चाहिए ही क्या ,
मंजिल से आगे निकल जाने के लिए ?


याद रखना जीवन को हमेशा सामने से जीना
छुप कर ओट से नहीं .
अगर कभी किसी प्रकार से मेरी जरूरत लगे
तो बस
एक कॉल की दूरी पर हूँ ,
काल और परिस्थिति मुझे कभी रोक नहीं पाई है ...
हमेशा तुम सब आगे बढ़ो..........
() सुमन सिन्हा, पटना (बिहार)

वाह रे ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम तुमने असंभव को संभव कर दिया
यह मैं नहीं कह रहा हूँ यह कहना है मेरा भारत महान की माला का ...!

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आपका यानी अन्य चिट्ठाकारों का क्या कहना है मैं बताऊंगा इस  कार्यक्रम के अगले चरण में...........उसके .पहले आईये चलते हैं कार्यक्रम स्थल की ओर जहां लोकसंघर्ष सुमन  हिंदी और उर्दू अदब के बहुचर्चित शायर गौहर राजा साहब से बातचीत करने जा रहे हैं......यहाँ किलिक करें
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उत्सव जारी है, बने रहिये परिकल्पना के साथ, मैं अभी गया और अभी आया

4 comments:

  1. संभावना हो तुम !!!!!!!
    रवीन्द्र प्रभात जी मुझे लगता है कि ये बहुत बड़ी शुभकामना है
    वैसे भी आपकी दृढ इच्छा शक्ति प्रशंसनीय है
    अविनाश भैया ने सही ही कहा अनेक ...............

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  2. ....बेहतर प्रस्तुति , बधाईयाँ !

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  3. वाकई आपने तो वह कर दिखाया
    सम्भावना की कोई सीमा जो नही है
    बधाई

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  4. जब दिखेगा इस तरह का हौसला..यह करने की अदम्य लालसा..रचने का अभिनव उत्साह..सदैव आशीर्वादित होगी कोई भी नई परिकल्पना ! बरबस ही फूटॆंगे मुँह से शुभकामनाओं और आशीर्वाद के वचन ! खुद ही बढ़ जाएंगी बाहें ! स्वयं ही तय हो जायेंगी राहें ..अपने आप समीप आ जायेगी उपलब्धि !
    परिकल्पना की जय हो !

    उत्तर देंहटाएं

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