नमस्ते
मैं रश्मि प्रभा !
सबसे पहले इस ब्लॉग उत्सव में आप सभी का अभिवादन करती हूँ और -

आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि आज  इस उत्सव में  श्री रवींद्र  प्रभात की सीधी बात हास्य कवि अलवेला खत्री से होगी, देश के मशहूर कार्टूनिष्ट श्री काजल कुमार अपने श्रेष्ठ कार्टून्स के साथ उपस्थित होंगे, बसंत आर्य अपनी हास्य कविता और ललित शर्मा उपस्थित होंगे अपने व्यंग्य के साथ....अपनी गंभीर कविताओं के साथ उपस्थित होंगी कवियित्री अल्पना वर्मा ......साथ ही  देश के मशहूर हास्य कवि श्री अरुण जेमनी  और आश कारन अटल सुनायेंगे अपनी हास्य कविताएँ डा० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर लेकर उपस्थित होंगे अपना आलेख समाज संचालन में सामाजिक सरोकारों की भूमिका ....आदि !

   इसके साथ-साथ मैं आपको लेकर जाती रहूँगी अपने परिचितों के पास आज की लाईफ स्टाईल पर चर्चा करने के लिए ...!

आज की परिचर्चा का विषय है - क्या आप आज के  लाईफ स्टाईल से संतुष्ट हैं ?

(शुरू में स्पष्ट कर दूँ ....किसी विषय पर बात करने का अर्थ यह नहीं होता कि उसके दूसरे पहलू नहीं , पर ९५% और ५% का फर्क होता है...)
आज की लाइफ स्टाइल-'शोर', चलती सुपरफास्ट के सामने से जैसे दृश्य बदलते हैं,वैसा माहौल ! डिस्को,कम कपड़े ,नशे में डूबा समूह ......कहने का दिल करता है,
मैं खो रही हूँ...
किसी सन्नाटे में
विलीन हो रही हूँ !

मौन-
जो सुनाई ना दे किसी को
उसीमें अंकित हो गई हूँ !
आकाश मेरी मुठ्ठी से निकल रहा है
धरती खिसक रही है
बदलते परिवेश की दस्तकों ने
मुझे पहचानने से इन्कार कर दिया है !
किसे आवाज़ दूँ?
और कैसे?
स्वर गुम हो गए हैं....
जहाँ तक दृष्टि जाती है
घर-ही-घर हैं
पर दूर तक बन्द दरवाज़े ...
कोलाहल में भी,
अंधे,गूंगे,बहरों की बस्ती -सी लगती है !

जहाँ खड़ी हूँ
वह जमीन अपनी नहीं लगती
न परिवेश अपना लगता है
आईने में
अपना चेहरा भी
अजनबी-सा लगता है !!!!!!!

यह सच है कि वक्त की रफ़्तार तेज़ है,पर रिश्तों का मापदंड क्यूँ बदल गया ?इन पंक्तियों का अर्थ आज भी है -

"सत्यम ब्रूयात,प्रियं ब्रूयात,
न ब्रूयात सत्यम अप्रियम "
और आज अप्रिय सत्य ही बेबाकी से बोलने में शान है,नंगा सत्य प्रस्तुत करने की होड़ है..........
हो सकता है , मैं विषय के सिर्फ एक पहलू पर गौर कर रही होऊं ,इसलिए अपने परिचितों के मध्य अपना सवाल रख दिया और ये रहे उनके क्रमवार विचार...................

किन्तु उन विचारों को प्रस्तुत करने से पहले आईये मैं आज के कार्यक्रम की शुरुआत करती हूँ अपने पडोसी राज्य गुजरात के सूरत शहर के निवासी और स्टार टी वी लाफ्टर तृतीय के प्रतिभागी देश के मशहूर हास्य कवि अलवेला खत्री जी के विचारों से . पिछले दिनों लखनऊ स्थित अपने निवास पर श्री रवींद्र प्रभात जी ने उनसे सीधी बात की   .......यहाँ किलिक करें

जारी है उत्सव एक  विराम के बाद मिलती हूँ आज के लाइफ स्टाइल पर अपने परिचितों के सारगर्भित विचारों के साथ ...!

4 comments:

  1. वह जमीन अपनी नहीं लगती
    न परिवेश अपना लगता है
    आईने में
    अपना चेहरा भी
    अजनबी-सा लगता है !!!!!!!
    बदलता वक़्त करवटे लेता हुआ कभी बहुत अपना कभी अजनबी लगता है ...मगर गुजर जाता है ...

    अप्रिय सत्य ही बेबाकी से बोलने में शान है,नंगा सत्य प्रस्तुत करने की होड़ है.......इस होड़ में बड़ी गठजोड़ है ...!!

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