हिंदी का एक ऐसा साधक जिसकी मौन साधना आगे-आगे चलती है और सारे स्वर-व्यंजन के साथ समय पीछे-पीछे ....जो एक समर्पित लेखक, अनुसंधानकर्ता, एवं हिन्दी-सेवी हैं.जिन्होंने भौतिकी, देशीय औषधिशास्त्र, और ईसा के दर्शन शास्त्र में अलग अलग विश्व्वविद्यालयो से डाक्टरेट किया है और आजकल पुरातत्व के वैज्ञानिक पहलुओं पर अपने अगले डाक्टरेट के लिये गहन अनुसंधान कर रहे हैं. जो एक अमरीकी विश्वविद्यालय के मानद कुलाधिपति भी हैं....!

जिन्होंने ६ भाषाओं में ६० से अधिक ग्रन्थ एवं ६००० से अधिक लेख दर्शन, धर्म, भौतिकी, विज्ञान, इलेक्ट्रानिक्स, संगणक, मनोविज्ञान, भाषा, जर्नलिस्म, पुरावस्तुशास्त्र, एवं देशी चिकित्सा पद्धतियों पर लिखा है. जिनका लिखा "हिन्दु धर्म परिचय" मलयालम भाषा में एक प्रसिद्ध पाठ्य पुस्तक है !

जिन्होंने अपने जीवन में राजभाषा हिन्दी की साधना और सेवा करने का प्रण बचपन में ही कर लिया था. जिनका मानना है कि यदि हम भारतीय संगठित हो जायें तो सन २०२५ से पहले हिन्दुस्तान एक विश्व-शक्ति बन जायगा. फिर से एक सोने की चिडिया भी बन जायगा....!
जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं हिंदी चिट्ठाजगत के परम श्रद्धेय चिट्ठाकार
शास्त्री जे. सी. फिलिप
ब्लोगोत्सव की टीम ने हिंदी के इस परम अनुरागी को वर्ष के श्रेष्ठ हिंदी प्रचारक का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !
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17 comments:

  1. मेरा परम सौभाग्‍य है कि पहली शुभकामना माननीय फिलिप जी को मैं दे पा रहा हूं। इस आनंद की अनुभूति का वर्णन करना संभव नहीं है।

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  2. वाह फिलिप जी को ढेरों बधाई ..उनसे मिलकर बहुत खुशी हुई.

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  3. फिलिप जी को ढेर सारी बधाईयाँ।

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  4. बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ.

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  5. शास्त्री जी को बहुत-बहुत बधाइयाँ !

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  6. फिलिप जी को ढेर सारी बधाईयाँ..!!

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  7. यह जो इतना कठिन परिश्रम किया जा रहा है परिकल्पना पर...उसके लिए आखिर किन शब्दों में आभार व्यक्त किया जा सकता है!

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