हमारे युग के सर्वाधिक लोकप्रिय गीतकार पद्मश्री नीरज की मान्यता है,कि " गीत ही आदि गीत ही मध्य गीत ही अंत, बिन गीत विश्व है केवल मरघट के सामान " राष्ट्रकवि दिनकर ने अपने महाकाव्य 'उर्वशी' में बड़े ही प्रभावी ढंग से निरुपित किया है , कि " बौद्धिक निर्मितियां नहीं हार्दिक प्रस्तुतियां ही अंतस के रक्तिम ज्वार की परिचय -पत्रिकाएं बनती है और एक क्रान्तिदर्शी कवि के अत्याहत रागतत्व को विजय- वैजयंती प्रदान करती है !"

एक ऐसा गीतकार जिसकी गीतात्मक अभिव्यक्तियों में एक और प्रीति के फाग का राग है तो दूसरी ओर गहन दार्शनिक चिंतन- सरणि का सारभूत अध्यात्म का पराग भी है ...!

एक ऐसा गीतकार जिसके बिंब और कथ्य ग्रामीण परिस्थितियों से लबरेज है वहीं भाव व्यापक प्रभामंडल को आयामित करने में समर्थ ...!

जिसकी प्रवाहशीलता के साथ-साथ अर्थ व्यंजनायें बरबस आकर्षित करती है और जिसकी जिन्दादिली से वाकिफ है पूरा हिंदी चिट्ठाजगत ...!

जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं रायपुर निवासी ललित शर्मा
जिन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (आंचलिक) का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !
विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ किलिक करें

23 comments:

  1. ललित भाई को बहुत बहुत बधाइयां

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  2. ललित जी इस सम्मान के सर्वथा योग्य हैं। उन्हें और आपको इस हेतु बधाई।

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  3. ललित शर्मा जी को बहुत बहुत बधाइयाँ!

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  4. परिकल्पना एवं सभी मित्रों का हृदय से आभारी हूँ, जो कि मुझ अकिंचन को इस योग्य समझा।

    धन्यवाद

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  5. बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  6. बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ।

    प्रमोद ताम्बट
    भोपाल

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  7. ललित जी को बहुत बहुत हार्दिक बधाई

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  8. ललित जी को बहुत बहुत हार्दिक बधाई

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