हिंदी चिट्ठाजगत में सक्रीय एक ऐसा कवि जो 20 वीं शताब्दी के आठवें दशक में अपने पहले ही कविता संग्रह 'रास्ते के बीच' से चर्चित हुए ! जो 38 वर्ष की ही आयु में 'रास्ते के बीच' और 'खुली आँखों में आकाश' जैसी अपनी मौलिक कृतियों पर 'सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड' जैसा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले पहले कवि बने । जिनका जीवन निरंतर संघर्षमय रहा है। जो 11 वीं कक्षा के बाद से ही आजीविका के लिए काम करते हुए शिक्षा पूरी की। जो 17-18 वर्षों तक दूरदर्शन के विविध कार्यक्रमों का संचालन किया और 1994 से 1997 में भारत की ओर से दक्षिण कोरिया में अतिथि आचार्य के रूप में भेजे गए, जहाँ साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उन्होंने कीर्तिमान स्थापित किए।

जानते हैं कौन हैं वो ?
वे हैं डा. दिविक रमेश

जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने इस बार वर्ष के श्रेष्ठ कवि का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है ...!

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10 comments:

  1. प्रिय भाई दिविक रमेश, बधाई। आप का श्रेष्ठ कवि के रूप में चुनाव करके ब्लागोत्सव के आयोजकों ने इसकी गरिमा बढाई है. रवीन्द्र प्रभात भी इसके लिये बधाई के पात्र हैं।

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  2. डा. दिविक रमेश जी को बहुत बहुत बधाई .....!!

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  3. रमेश जी को बहुत बहुत बधाईयाँ।

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  4. दिविक जी को तो हम भी लंबे समय से पढ़ते आए हैं. चयन पर हार्दिक बधाई.

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