कहा जाता है कि -" जिस टिप्पणी में दर्शन नहीं वह टिपण्णी कहाँ ?" वह तो मरे हुए कुछ शब्दों की शवयात्रा है . ...!

टिप्पणी तो साधना के तन और मन के पोर-पोर को झंकृत करने की क्षमता रखती है , हहराती-घहराती आकाश की छाती चीरती कुत्सित विचारधाराओं को विचलित कर देती है .

टिप्पणी में तो वह शक्ति होती है कि पराजय के कगार पर पहुंचे योद्धाओं में जीत की ललक जगा देती है .परों की तलाश में भटकती हुयी साधना को माया और राम दोनों के दर्शन करा देती है . यानी टिप्पणी साहित्य के लिए अमृत भी है और विष भी ....इसलिए उसका महत्व साहित्य की तमाम विधाओं से कहीं ज्यादा है .

एक ऐसा कवि जिसकी पहचान हिंदी चिट्ठाजगत में धूमकेतु के सामान है , जिनकी कवितायें हिंदी साहित्य को प्रयाग की पावनता प्रदान करती है , सुर-सरस्वती और संस्कृति की त्रिवेणी में डूबने को मजबूर कर देती है , पाठकों के मन-मस्तिस्क पर सीधे उतर जाने वाले इस युवा कवि का नाम है- हिमांशु

किन्तु ब्लोगोत्सव में उनके द्वारा प्रस्तुत सारगर्भित टिप्पणियों के लिए ब्लोगोत्सव की टीम ने उन्हें वर्ष के श्रेष्ठ टिप्पणीकार (पुरुष) का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !
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21 comments:

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  2. हिमांशु जी को बहुत बहुत बधाई....यह सही है कि टिप्पणियाँ जहाँ अमृत का काम करती हैं वहाँ कभी कभी विष भी बन जाती हैं ....लेकिन स्वस्थ वार्तालाप तक ही सीमित होनी चाहिए टिप्पणियाँ... ऐसा ना हो कि रचनाकार का मार्ग अवरुद्ध हो जाये...सच तो यह है कि टिप्पणियाँ रचनाकार की रचनात्मकता के लिए रामबाण होती हैं...
    पुन: शुभकामनाएं

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  3. हिमांशु जी को बहुत बहुत बधाई....

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  4. हिमांशु जी को बहुत बहुत बधाइयाँ।

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  5. हिमांशु जी को बहुत बहुत बधाई

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  6. हिमांशु जी को मेरी तरफ से भी ढेरों बधाई.

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  7. बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  8. हिमांशू जी को हमारी शुभकामनाएँ ...टिप्पणी देना भी एक कला है ...जो न केवल रचना के मर्म को पहचानने में मदद करती है, बल्कि रचना के अनछुए पहलुओं से भी रुबरु कराती है । परिकल्पना ने ऐसे टिप्पणीकार को पहचाना, उसके लिए आभार ।

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  9. हिमांशु जी को बहुत बहुत बधाइ ....

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  10. हिमांशु जी....... बंधाई स्वीकारें .

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