अभी ब्रेक से पहले हम संगीता जी के विचारों से रूबरू हुए, अब आईये चलते हैं श्री सुभाष राय जी के पास और उनसे पूछते हैं क्या है उनके लिए आज़ादी के मायने ?


आजादी में संयम अंतर्निहित होता है। वह उन्मुक्ति या स्वच्छन्दता नहीं देती। जिस आजादी में आत्मनियंत्रण नहीं है, वह जल्दी ही अराजकता में बदल जायेगी। कोई भी इस तरह आजाद नहीं हो सकता कि वह किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाये। चाहे वह लिखने की आजादी हो या बोलने की, चाहे वह देश की आजादी हो या समाज की या व्यक्ति की। आजादी के मायने मनमानेपन से नहीं लगाया जाना चाहिये। आजादी हमेशा सकारात्मक जीवन मूल्यों को उर्वर जमीन मुहैया कराती है, वह व्यक्ति, समाज और देश के जीवन में शांति, विकास और समृद्धि का संगीत भरती है। आकाश में उड़्ता हुआ पक्षी आजाद तो होता है लेकिन उसे लगातार ध्यान रखना पड़्ता है कि कहीं उसके पंख किसी पेड़ या पहाड़ से टकरा न जायें। अगर वह ऐसा न करें तो किसी समय उसके पंख टूट सकते हैं, उसकी जान भी जा सकती है। जो समाज आजादी का अर्थ निरंकुशता, उन्मुक्ति या मनमानेपन के रूप में लगाता है, वह भी उसी असावधान पक्षी की तरह नष्ट हो जाता है। अराजकता हमेशा गुलामी या विनाश की ओर ले जाती है। सच्ची आजादी का मतलब ऐसे कर्म और चिंतन के लिये आसमान का पूरी तरह खुला होना है, जो समूचे समाज को, देश को लाभ पहुंचा सके।
डा. सुभाष राय
(वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर )
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जारी है परिचर्चा, मिलते हैं एक अल्पविराम के बाद......

4 comments:

  1. bilkul sahi kaha apane .........aajadi ka katai yah matalab nahi hai ki jo dusare ki aajadi ka hanan kare ........anushasan ke saath ji gayi aajadi hi sahi mayane aajadi hai .........jo ek swasth byakti ,pariwar,samaj our desh ka nirman kar sakata hai .......thank you very much

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  2. सहमत हूं .. आजादी पर सटीक विचार हैं!!

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  3. अराजकता हमेशा गुलामी या विनाश की ओर ले जाती है।
    अनुशासन ही देश को महान बनाता है।

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