आज शिक्षक दिवस है। दिवसों की भीड़ में एक और दिवस.......!
गुरु, शिक्षक, आचार्य, उस्ताद, अध्यापक या टीचर ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को व्याख्यातित करते है जो हमें सिखाता है, ज्ञान देता है। इसी महामानव को धन्यवाद देने का , अपनी कृतज्ञता/आभार/शुक्रगुजारी दर्शाने का एक दिन है जो की शिक्षक दिवस के रूप आज हमारे सामने है.....!
केवल धन दे कर शिक्षा हासिल नहीं होती। अपने गुरु के प्रति आदर, सम्मान और विश्वास , ज्ञानार्जन में बहुत सहायक होता है। कई सारी दुविधाये केवल एक विश्वास की 'मेरे गुरु ने सही बताया है' से मिट जाती है। ऐसा कह गया है की बिना गुरु के ज्ञान प्राप्त नहीं होता, अर्थात-"गुरु बिनु ज्ञान कहाँ जग माही"। कबीर ने कहा है-
"गुरु पारस को अन्तरो ,जानत है सब सन्त ।
वह लोहा कंचन करे, ये करि लेय महन्त॥"
यह सर्वविदित है कि गुरु चाणक्य ने एक साधारण बालक को देश का सम्राट बना दिया , गुरु द्रोण ने अर्जुन को एक कुशल धनुर्धर होने का सम्मान दिया । अर्थात गुरु में वह शक्ति होती है कि वह अपने शिष्यको अपने समान महान बनाने का विशिष्ट कार्य करता है । कहा भी गया है -
"गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष ।
गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटे न दोष ॥ "
कबीर ने तो इतना तक कह डाला है कि -
"कबीरा ते नर अंध हैं, गुरु को कहते और।
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर॥"
बहुत सारे कवियों /मनीषियों ने कितने ही पन्ने गुरु की महिमा में रंग डाले और गुरु को गोविन्द से भी ऊपर होने का मान दिया , जैसे- "गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागूं पाँय ।
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो मिलाय ॥"
या फिर इन पंक्तियों में देखें-
जो गुरु बसै बनारसी ,सीष समुन्दर तीर।
एक पलक बिसरे नहीं ,जो गुण होय शरीर ॥
गुर धोबी शिष्य कपड़ा, साबू सिरजन हर।
सुरती सिला पुर धोइए, निकसे ज्योति अपार ॥
गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष ।
गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटे न दोष ॥
गुरु कुम्हार सिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट ।
अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट ॥
गुरु-गुरु में भेद है, गुरु-गुरु में भाव ।
सोइ गुरु नित बन्दिये, शब्द बतावे दाव ॥
आईये आज शिक्षक दिवस पर हम सब अपने -अपने गुरु/शिक्षक/मार्गदर्शक/प्रेरणास्त्रोत के प्रति अपना आभार, अपनी कृतज्ञता , अपनी शुक्रगुजारी व्यक्त करते हैं और इस अवसर पर विशेष रूप से उन्हें नमन करते हैं और कहते हैं-
" गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुर्साक्षात्‌ परमब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवैनमः॥"
साथ ही जिनके जन्म दिवस पर हम मनाते हैं यह अविस्मरनीय दिवस उस महान शिक्षक भारत के द्वितीय राष्ट्रपति , शैक्षिक दार्शनिक डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि !

8 comments:

  1. बहुत सुन्दर उपयोगी आलेख। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को हमारी भी विनम्र श्रद्धाँजली। धन्यवाद।

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  2. धन्य हो......बहुत अच्छी पोस्ट !

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  3. बहुत सुन्दर विचार , आभार !

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  4. सर्वप्रथम गुरुदेव को प्रणाम !बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति है यह, अच्छा लगा पढ़कर

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