हर व्यक्ति जीवन में पद,प्रतिष्ठा, प्रशंसा , पैसा और प्रसिद्धि की उच्चाकांक्षा रखता है । यही पांच "प" व्यक्ति के तनाव का मुख्य कारण बनता है । पूरा न होने की स्थिति में उसके अन्दर झुंझलाहट की प्रवृति विकसित होती चली जाती है । दूसरों के वजूद को नकारना उसकी आदत बनती चली जाती है । वह धीरे-धीरे विध्वंसक होता चला जाता है । इसके बिपरीत जो सृजनात्मकता को जीवन जीने का माध्यम बनाता है उसके लिए ये पाँचों "प" कोई मायने नहीं रखता । वह आशावादी होता है और उसे पता होता है कि वह अपनी योग्यता, प्रतिभा और पुरुषार्थ के बल पर वह सबकुछ प्राप्त कर लेगा जिसकी वह ख्वाहिश रखता है ।
जीवन एक प्रतियोगिता है । इस प्रतियिगिता में तरह-तरह के उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते हैं । इसलिए नए वातावरण में ढलने का प्रयास आपको तनाव से मुक्त रख सकता है ।


ब्लोगिंग में सक्रिय रहकर आप अपनी व्यथा , अपनी बात और अपनी जिज्ञासाओं से अपने मित्रों को रूबरू करा सकते हैं । उनसे राय ले सकते हैं और उनके सकारात्मक सुझाव का सहारा लेकर आगे की योजना को मूर्तरूप दे सकते हैं ।


एक-दूसरे के बारे में जानना, परस्पर एक-दूसरे के साथ संपर्क बनाए रखना मानवीय स्वभाव है । जहां वह अपने बारे में दूसरों को बताना चाहता है वहीं एक-दूसरे की सभी बातों को जानने को इच्छुक रहता है । जानने-बताने के इसी स्वभाव के चलते ब्लोगिंग का विकास हुआ । आज यह समाज का एक सशक्त माध्यम बन गया है । आज के समय में विश्व का कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है । इस विशाल समाज को एक-सूत्र में पिरोये रखने के लिए जरूरी है कि ब्लोगिंग को संवाद के एक वृहद् मंच के रूप में विकसित किया जाए ।


आज त्वरित संवाद के इस माध्यम ने हमें एक ऐसा वृहद् प्रभामंडल दे दिया है कि हम इसके माध्यम से एक सुखद , सुन्दर और खुशहाल सह-अस्तित्व की परिकल्पना को मूर्तरूप दे सकते हैं । न कि कौन किससे आगे निकल जाए, कौन किसको पछाड़े आदि गलत प्रवृतियों को अपनाकर वातावरण को प्रदूषित किया जाए । प्रतोयोगिता अवश्य हो पर स्वस्थ प्रतियोगिता हो इस बात का ध्यान रखा जाए । किसी के भुलावे में, बहकावे में आकर असंसदीय व्यवहार न किया जाए । यह तो खांडे की वह तीव्र धार है जिसपर सच्चाई और निष्ठा का पालन करने वाले ही चल सकते हैं । लोगों को उनके कर्तव्यों और अधिकारों से अवगत कराना, अपनी-अपनी सृजनात्मकता को धार देना,समाज की बुराईयों, कुरीतियों से लड़ने का साहस देना, स्वयं से जुड़े हुए लोगों को जागरूक रखना , उन्हें सचेत और सचेष्ट बनाए रखना ही ब्लोगिंग का प्रथम कर्त्तव्य होना चाहिए ।


ध्यान दें- ब्लोगिंग वह सूत्र है जो लोगों को लोगों से , देश को देश से, भाषा को भाषा से तथा संसार को आपस में जोड़ती है, यानी वसुधैव कुटुंबकम की भावना को चरितार्थ करती है ब्लोगिंग ।


इसलिए ब्लोगिंग को बनाए तनाव मुक्त जीवन का एक हिस्सा ।

हम शीघ्र लेकर आ रहे हैं परिकल्पना समूह का एक और नया पन्ना जिसके अंतर्गत हम करेंगे बारी-बारी से प्रेरक ब्लोग्स की परिक्रमा और बताएँगे आपको कि क्यों अनुसरण किया जाए उस ब्लॉग का .....हिंदी चिट्ठाजगत की बिलकुल नयी और जिज्ञासापूर्ण परिकल्पना .......यानी ब्लॉग परिक्रमा
आगे चलकर हम इस पन्ने से जोड़ेंगे कुछ प्रेरणास्त्रोत वरिष्ठ चिट्ठाकारों को और उनके माध्यम से होगी ब्लोगिंग से संवंधित शिक्षा-दीक्षा की बात । दी जायेगी महत्वपूर्ण जानकारियाँ और की जायेंगी नए प्रतिभाओं को आगे लाने की प्रक्रिया .....इस नए पन्ने से संवंधित यदि कोई सुझाव देना चाहें तो आपका स्वागत है ।

21 comments:

  1. कित्ती अच्छी-अच्छी जानकारियां मिल रही हैं...
    _____________________________
    'पाखी की दुनिया' - बच्चों के ब्लॉगस की चर्चा 'हिंदुस्तान' अख़बार में भी.

    उत्तर देंहटाएं
  2. पर कई बार ब्लॉग्गिंग बिना मतलब में तनाव भी तो दे देती है.... उसका क्या करें?

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया लगी यह जानकारी ब्लॉग पढना लिखना वाकई टेंशन फ्री कर सकता है ..पर्सनल तजुर्बे से :)

    उत्तर देंहटाएं
  4. महफूज़ भाई,
    परस्पर स्नेह और सद्भावनापूर्ण संवाद कायम करते हुए भय-भ्रम-भ्रान्ति से परे होकर ब्लोगिंग करने वाले तनावग्रस्त हो ही नहीं सकते....आपको तो मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ ...आप एक खुशमिजाज इंसान हैं ! तनाव को ब्लोगिंग का हिस्सा मत बनाईये, ज़िंदगी में और भी कुछ है ब्लोगिंग के सिवा ! यह तनाव वहां भी आपका पीछा करेगा ! कोशिश करके देखिये तनाव से निजात पाया जा सकता है !

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी बातों से सौ फीसदी सहमत, हैप्पी ब्लोगिंग नो टेंशन !

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया लगी यह जानकारी ,

    उत्तर देंहटाएं
  7. सकारात्‍मकता जीवन को नए आयाम देती है इसलिए प्रत्‍येक जगह केवल सकारात्‍मक रहें। बहुत अच्‍छी पोस्‍ट। ब्‍लागिंग मेरे लिए भी वसुधैव कुटुम्‍बकम ही है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. लोकैषणा समस्त बुराईयों की जड़ है।
    सिर्फ़ लोकैषणा की तृप्ति के लिए कार्य करने वाला व्यक्ति हमेशा अतृप्त होता है तथा यही अतृप्ति कुंठा बनकर विनाश करती और कराती है।

    बहुत बढिया चिंतन रविन्द्र भैया
    आभार

    उत्तर देंहटाएं

  9. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

    उत्तर देंहटाएं
  10. ब्लोगिंग पर अच्छे और विचारवान लोगों का सलाह और सुझाव ही आपको टेंसन मुक्त कर सकता है ,कुछ ज्यादा समझदार लोगों के विचार आपकी टेंसन को बढा भी देता हैं ...? अच्छी प्रस्तुती...वैसे हर ब्लोगर को यही कोशिस करनी चाहिए की उसकी लेखनी से किसी को टेंसन न हो ....बल्कि एक सार्थकता का एहसास हो ..

    उत्तर देंहटाएं
  11. ब्लॉगिंग से नया जीवन मिला है...आपके सुझावों से सहमत...आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  12. bilkul sahi baat..... Happy Blogging.... achhe lekhn ki prerna bhi deti hai yeh jankari bhari post... kyonki arthpoorn lekhan tenshan nahin deta....

    उत्तर देंहटाएं
  13. रवीन्द्र जी एक और अच्छा प्रयास। इसके लिये शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

 
Top