ग़ज़ल
ख़्वाबों की ताबीर तुम्हारी आँखों में है,
शोख़ जवाँ कश्मीर तुम्हारी आँखों में है।

तुझमें है तासीर मोहब्बत की भीतर तक,
शायर गालिब-मीर तुम्हारी आँखों में है।

सुबहे काशी का मंजर ओ' शाम अवध का,
क्या सुन्दर तस्वीर तुम्हारी आँखों में है।

छलकाए रस अंगूरी नेह लुटाए हौले से,
राँझा की वो हीर तुम्हारी आंखों में है।

ताजमहल का अक्स नक्श एलोरा का,
प्यार की हर जागीर तुम्हारी आँखों में है।

भरी उमस में पिघल-पिघल के बरसे जो,
हिमाचल की पीर तुम्हारी आँखों में है।

बूँद-बूँद को तरस उठे जो देखे बरबस,
राजस्थानी नीर तुम्हारी आँखों में है।

गोरी गुज़रती गुड़िया शर्मीली-सी,
सागर-सी गम्भीर तुम्हारी आँखों में है।

चाँद सलोना देख-देख के सागर झूमे,
गोवा की तासीर तुम्हारी आँखों में है।

कान्हा नाचे रास रचाए छलकाए,
रोली-रंग-अबीर तुम्हारी आँखों में है।

तिरुपती की पावन मूरत सूरत-सी,
दक्षिण की प्राचीर तुम्हारी आँखों में है।

तमिल की ख़ुशबू कन्नड़-तेलगू की चेरी,
झाँक रही तदबीर तुम्हारी आँखों में है।

खजुराहो की मूरत जैसी रची-बसी हो,
छवि सुन्दर-गम्भीर तुम्हारी आँखों में है।

गीत बिहारी गए, बजे संगीत रवीन्द्र,
भारत की तकदीर तुम्हारी आँखों में है।

() रवीन्द्र प्रभात
(फोटो साभार :www.facepaintingtips.com/)

13 comments:

  1. bahut khoob... aapne to aankho mein desh-darshan karwaa diye... beautiful...

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  2. बहुत सुन्दर ...इन आँखों से तो पूरा भारत दर्शन हो गया ...सुन्दर गज़ल

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  3. ख़्वाबों की ताबीर तुम्हारी आँखों में है,
    शोख़ जवाँ कश्मीर तुम्हारी आँखों में है।
    सुभानल्लाह ...........

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  4. बहुत ही सुन्‍दर हर शब्‍द एक-एक दृश्‍य का सजीव चित्रण करते हुये, बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  5. आपके ग़ज़ल कहने का अंदाज़ विल्कुल जुदा है !

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  6. अरे वाह आज तो सुबह सार्थक हो गई..बहुत सुन्दर कविता.

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  7. तुझमें है तासीर मोहब्बत की भीतर तक,
    शायर गालिब-मीर तुम्हारी आँखों में है।

    छलकाए रस अंगूरी नेह लुटाए हौले से,
    राँझा की वो हीर तुम्हारी आंखों में है।

    भरी उमस में पिघल-पिघल के बरसे जो,
    हिमाचल की पीर तुम्हारी आँखों में है।
    वाह रवीन्द्र जी हर एक शेर लाजवाब। भारत का पूरा खाक खींच दिया गज़ल मे। बधाई।

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  8. PRIY BHAI AP KAA KAVI JAGA RAHATA HAI TO ACHCHHA LAGATA HAI. DESH KEE TAKADEER AISE HEE JAGE HUE LOGON KE HAATHON MEN HAI. ACHCHHEE RACHANA KE LIYE BADHAAI.

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  9. आपकी ग़ज़ल में समाया है पूरा हिन्दुस्तान ......प्रणाम आपकी अभिव्यक्ति और शायरी की मयार को !

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  10. बहुत सुन्दर ग़ज़ल...हर एक शेर लाजवाब।

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  11. गज़ब की ग़ज़ल..............

    बूँद-बूँद को तरस उठे जो देखे बरबस,
    राजस्थानी नीर तुम्हारी आँखों में है।

    वाह !

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  12. वल्लाह कहाँ कहाँ घुमा लाई ये हसीं आखें ......बहुत उम्दा

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