परिकल्पना पर आज : गुरु बिनु ज्ञान कहाँ जग माही....
आज शिक्षक दिवस है। दिवसों की भीड़ में एक और दिवस.......!
गुरु, शिक्षक, आचार्य, उस्ताद, अध्यापक या टीचर ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को व्याख्यातित करते है जो हमें सिखाता है, ज्ञान देता है। इसी महामानव को धन्यवाद देने का , अपनी कृतज्ञता/आभार/शुक्रगुजारी दर्शाने का एक दिन है जो की शिक्षक दिवस के रूप आज हमारे सामने है.....!
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ब्लोगोत्सव-२०१० पर आज :शिक्षक दिवस पर कवि दीपक शर्मा की अभिव्यक्ति
आपके आशीष से ,तालीम से और ज्ञान से
उपदेश से ,उसूल से , सार और व्याख्यान से

अप्रमाण जीवन को मिली परिधि नई,नव दिशा
श्वेत मानस पटल पर स्वरूप विद्या का धरा

डगमगाते कदम को नेक राह दी,आधार दिया
संकीर्ण ,संकुचित बुद्धि को अनंत सा विस्तार
दिया.....आगे पढ़ें



वटवृक्ष पर आज : न जाने कहाँ से आए हैं हम ( गीत )
ज़िन्दगी को सब परिभाषित करना चाहते हैं , सब उसे पकड़ना चाहते हैं ...... पर ज़िन्दगी अनुत्तरित प्रश्न बनकर कभी घनी अमराइयों से गुजरती है, कभी हीर की कहानी बनती है कभी चनाब के पानी से सोहनी महिवाल का रूप लिए प्यार के गीत गाती है , कभी नन्हें पदचिन्हों से चेहरा सटाकर बैठती है, कभी पर्वतों पर बादल बनकर उतरती है , कभी वादियों से आवाज़ बनकर झंकृत होती है ............ आगे पढ़ें ॥



शब्द सभागार में आज: डॉ. ऋषभदेव शर्मा को आंध्र सरकार का सम्मान
हैदराबाद । आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी, हैदराबाद द्वारा वर्ष २०१० के लिए आंध्र प्रदेश के हिंदी सेवियों और हिंदी साहित्यकारों को विभिन्न पुरस्कार प्रदान किये जाने की घोषणा की गई है। इस वर्ष का हिंदीभाषी लेखक पुरस्कार विगत बीस वर्षों से दक्षिण भारत में हिंदी के उच्च स्तरीय अध्यापन और शोधकार्य के साथ निरंतर विविध विधाओं में श्रेष्ठ आलोचनात्मक तथा सृजनात्मक मौलिक लेखन के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य की सेवा कर रहे डॉ. ऋषभ देव शर्मा को प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है। ...आगे पढ़ें

5 comments:

  1. शानदार प्रस्तुति, मेरी शुभकामनाएं है कि परिकल्पना आकाश से भी ज्यादा विस्तारित हो !

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  2. सचमुच परिकल्पना का विकल्प नहीं , यह अपने आप में एक संपूर्ण ब्लॉग है, बधाईयाँ !

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  3. परिकल्पना -- को देख कर एक सुखद अनुभूति होती है बहुत सुन्दर सार्थक प्रयास है। बधाई इस शानदार प्रस्तुति के लिये।

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