जी हाँ एक ऐसा गीत जो ज़िन्दगी की थीम पर थिरकते हुए ऐसे अनछुए पहलुओं को सामने लाता है, कि बरबस थिरकने लगते हैं हमारे होठ और अंगराईयां लेने लगती है हमारी भावनाएं .....इस गीत को लिखा है कवियित्री रश्मि प्रभा ने , संगीत दिया है ऋषि ने और गाये हैं श्री राम इमानी और कुहू गुप्ता ने ! इसे सुनकर ऐसा लगता है कि संध्या ने उषा में प्रभात के गीत गाये हों , लीजिये आप भी सुनिए -


7 comments:

  1. बहुत सुन्दर गीत ....सुनना अच्छा लगा !
    आपको सपरिवार प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ !!
    उल्फ़त के दीप

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  2. प्रेम से करना "गजानन-लक्ष्मी" आराधना।
    आज होनी चाहिए "माँ शारदे" की साधना।।
    --
    आप खुशियों से धरा को जगमगाएँ!
    दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!

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  3. सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  4. बहुत बढ़िया, लगता है गाने वालों ने प्राण फूंक दिए हो वातावरण में , सुनवाने का शुक्रिया !

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