संभावना और आशंका हर व्यक्ति से जुडी होती है परन्तु व्यक्ति को आशंकाओं से नहीं संभावनाओं से जुडा होना चाहिए ।

कहा गया है कि भावना सफलता की पहली सीढ़ी है । विश्वास से व्यक्ति कर्त्तव्य की ओर बढ़ता है और कर्त्तव्य से समन्वय प्राप्त करना आसान हो जाता है ....ऐसा मेरा मानना है ।

एक प्रश्न आपके लिए -
क्या संभव नहीं कि हिंदी ब्लोगिंग रुपी यह परिवार विश्व का एक आदर्श परिवार बन जाए , जहाँ हर ब्लोगर एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करे , रिश्तों की अहमियत समझे और किसी को भी भावनाओं के स्तर पर आह़त न करे ?

पूरे वर्ष भर की गतिविधियों पर विहंगावलोकन के क्रम में इस बार हम इन विषयों पर भी चर्चा करेंगे और आपको बताएँगे की ऐसे कितने ब्लोगर हैं जो इस दिशा में अपना सकारात्मक नज़रिया रखते हैं । इस वर्ष का ब्लॉग विश्लेषण ऐसा होगा जिसमें पहली बार हम आपके महत्वपूर्ण विचारों को पोस्ट में स्थान देते हुए आम राय बनाने की कोशिश करेंगे ।

परिकल्पना पर शीघ्र हम लेकर आ रहे हैं कई भागों में ब्लॉग विश्लेषण-२०१०

अर्थात -
वर्ष-२०१० : हिंदी ब्लोगिंग ने क्या खोया -क्या पाया ?

यदि आप सक्रिय ब्लोगर हैं और वर्ष-२०१० की गतिविधियों पर आपकी पैनी नज़र रही है तो आप भी इस महत्वपूर्ण चर्चा का हिस्सा हो सकते हैं । आप अपने विचारों अथवा जानकारियों से हमें रूबरू कराएं । हम चर्चा के दौरान आपके विचारों अथवा जानकारियों को पूरा सम्मान देंगे और उसे आपके संवाद के अन्तरगत हुबहु प्रकाशित करेंगे , चाहे आपके विचार कड़वे ही क्यों न हो ......!

आप चाहें तो टिप्पणी बॉक्स में भी अपने विचारों अथवा जानकारियों को प्रस्तुत कर सकते हैं , या फिर मेरे मेल पर ....!

आप मेरा मेल आई डी जानते ही होंगे , खैर फिर से बता देता हूँ -

3 comments:

  1. रविन्द्र जी आप जिस निष्ठा से ब्लागजगत की बेहतरी के लिये काम कर रहे हैं उससे लगता है कि अगर ब्लागजगत मे आप जैसे कुछ और लोग आ जायें या इनमे से कुछ अच्छे लोग इस काम को अंजाम देंगे तो जरूर सफलता मिलेगी। नये आने वाले ब्लाग की अहमियत को समझेंगे। बहुत सार्थक प्रयास है। शुभकामनायें। भेजते हैं कुछ लिख कर।

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  2. संभावनायें मनन करनी होंगी आगे बढ़ने के लिये।

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