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दशक  के 
हिंदी चिट्ठाकार 
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(1) समीर लाल  समीर 
(2) रवि  रतलामी 
(3) अनूप शुक्ल 
(4) रंजना  रंजू भाटिया 
(5) दिनेश राय  द्विवेदी 
(6) बी. एस. पावला 
(7) कविता वाचक्नवी 
(8) शास्त्री जे सी फिलिप 
(9) पूर्णिमा वर्मन 
(10) सतीश सक्सेना 

दृष्टव्य : इसके अलावा अविनाश वाचस्पति, रश्मि प्रभा , अरविन्द   मिश्र  और  ज्ञान दत्त पाण्डेय भी 96 घंटे की रुझान में क्रमश: ग्यारहवें से पन्द्रहवें स्थान पर हैं . 
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दशक  का 
हिंदी चिट्ठा 
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(1) उड़न तश्तरी 
(2) भड़ास 
(3) ब्लॉग स इन  मिडिया 
(4) साई ब्लॉग 
(5) अजदक 
(6) फ़ुरसतिया 
(7) साइंस ब्लोगर असोसिएशन 
(8) छींटे और बौछारें 
(9) तीसरा खंबा 
(10) नुक्कड़ 

दृष्टव्य : इसके अलावा मोहल्ला, नारी, मेरी भावनाएं, शब्दावली   और गत्यात्मक  ज्योतिष  भी 96 घंटे की रुझान में क्रमश: ग्यारहवें से पन्द्रहवें स्थान पर हैं . 
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विगत 48 घंटों की रुझान  के पश्चात  मतदाताओं ने कुछ  और नए नाम  जोड़े हैं जैसे  जाकिर अली  रजनीश, अविनाश  दास, अजित  वडनेरकर, हंस राज सुज्ञ , सुरेश  चिपलूनकर और कुमार राधारमण  ...!  


पत्तों से चाहते हो बजे साज की तरह । 
पेंडो से पहले उदासी तो लीजिये ।।


चीजें जो मैंने अपने जीवन मे सीखी, उसमे से एक यह भी है कि आप किसी को बाध्य नहीं कर सकते कि वह आपकी किसी सोच का समर्थन करे । आप केवल अपील कर सकते हैं या फिर उन्हें प्रेरित कर सकते हैं या फिर विश्वास दे सकते हैं कि वह आपके सच्चे कार्यों का समर्थन करे। बाकी सब उनके विवेक पर छोड़ दें । 

चीजें जो मैंने अपने जीवन मे सीखी, उसमे से एक यह भी है कि जो आपके वश मे नहीं है उसको महत्व न दें, परंतु जो आपके वश मे है उसे निरर्थक न जाने दें । क्योंकि आप झटके मे कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो हमेशा-हमेशा के लिए आपके दिल का दर्द बन जाता है ।

मैंने यह भी सीखा है कि चाहे साहित्य हो या ब्लोगिंग, कुछ तो लोग कहेंगे ही.....। रोजमर्रा के जीवन में जैसे हम कुछ चीजों की अनदेखी करते हैं,यहाँ भी आवश्यकतानुसार अनदेखी करते हुए अपने कर्मों को महत्व दिया जाए । क्योंकि बहुत आसान होता है अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करना जबकि सोचना उतना महत्व नहीं रखता ।


 चीजें जो मैंने अपने जीवन मे सीखी, उसमे से एक यह भी है कि ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो आपको चाहते हैं,आपकी परवाह करते हैं, पर वे तय नहीं कर पाते कि अपनी चाहत को कैसे प्रदर्शित करें ? ऐसे मित्रों की पहचान भावनाओं के बल पर करें न कि प्रेक्टिकल होकर । आपके दो शब्द उसके दर्द को कम कर सकता है। 


 मैंने यह भी सीखा है कि जब आपका मित्र आपकी मदद चाहता है, तब आप अपने को शक्तिशाली समझें और उपयोगी भी। मैंने यह भी सिखा है कि आपका जीवन कुछ घंटों में बदल सकता है उन व्यक्तियों के द्वारा जिन्हें आप जानते भी नहीं । 


 हर सिक्के के दो पहलू होते हैं सकारात्मक और नकारात्मक। एक नकारात्मक पहलू यह भी है : उसकी कमीज मेरे कमीज से सफ़ेद क्यों—आज का समाज इसी थीम पर चल रहा है । विज्ञापन मे गंदी कमीज को उजला करने का रास्ता बताया जाता है । राजनीति मे साफ कमीज को गंदा करने के रास्ते तलाशे जाते हैं । राजनीति जब किसी सभ्य समाज पर हावी हो जाती है तो उस समाज से उजली कमीजों की तादाद लगातार कम होने लगती है । तपेदिक हो जाता है सच को । परिकल्पनाएं लूली-लंगड़ी हो जाती है और मर्यादाएं रोज लांघने लगती है लक्ष्मण रेखा ।


 किन्तु इससे अलग जो व्यक्ति अपने और समाज के प्रति ईमानदार है वह केवल और केवल आगे की सोचता है । आप भी आगे की सोचिये और दशक के हिंदी ब्लोगर और ब्लोग्स के चुनाव में अपना महत्वपूर्ण मत अवश्य दीजिये।


 इसी पोस्ट में नीचे लिंक भी निहित है । कोई वन्दिश नहीं है कि आप किसको वोट करेंगे । आपका अंतर्मन जिसे भी वोट करने को कहे उसको कर दें । वोट करना बहुत आसान है . प्रपत्र मे दो प्रश्न है एक है दशक का ब्लॉगर ? और दूसरा है दशक का ब्लॉग? उसके नीचे विकल्प दिये गए हैं, हर नाम के पहले एक गोला है जिसमे आपको किलिक करना है ....यदि उस विकल्प से आप सहमत नहीं हैं तो अदर मे अपनी पसंद के किसी और ब्लॉग अथवा ब्लॉगर का नाम अंकित करते हुये सबसे नीचे सबमिट का बटन बना है उसपर किलिक कर दें ....हो गया आपका वोट पूर्ण ।
 

तो देर न करें वोटिंग लाइन अभी चालू है, इस लिंक पर जाकर अपने प्रिय ब्लॉगर को अवश्य वोट दें । याद रखें आपका वोट हमारे लिए महत्वपूर्ण है।

10 comments:

  1. मैं साईब्लाग के शुभचिंतकों और प्रस्तावकों को तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ जिन्होंने मुझे नीचे से काफी ऊपर पहुंचा दिया है ...
    ऐसे ही स्नेह बनाये रखें मित्रों !

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  2. जानता हूँ नामांकन प्रस्तावों के क्रिटेरिया में मैं नहीं आता, न इस संघर्ष में मेरे होने की सम्भावना भी अनुमानित की जा सकती है। उसके उपरांत भी आप शुभचिंतक मतदाताओं ने मेरा नाम प्रस्तावित किया। आपके इस स्नेह से गदगद हूँ। मैं तो इस नामोल्लेख से ही सफलता अनुभूत कर रहा हूँ। यह महसुस कर रहा हूं कि मेरे श्रम के प्रति आप सब में सहानुभूति है। आपका प्रोत्साहन सर आंखो पर। आपका भावभीना आभार!!

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  3. हम तो आपके भावनात्मक अपील से ही गदगद हैं ....सफलता की शुभकामनाएं !

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  4. गजब है ..जो भी आयेगा, अच्छा ही आयेगा.

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  5. मैंने भी वोट कर दिया है, बहुत-बहुत बधाईयाँ !

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  6. कहीं आप इन्हें भूल तो नहीं रहे?……
    http://blog.blogadda.com/2012/05/17/anurag-sharma-hindi-blogger-pittsburgh

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  7. कहां है रुझान
    मैं तो ढूंढते ढूंढते
    हो गया हूं परेशान
    96 घंटे बाद वाले
    हम वह हैं जो
    परेशानी को समझते
    हैं शाहरुख खान
    नहीं शान।

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  8. आज का परिणाम नहीं देखा, लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं है कि जो लोग चुने जायेंगे वे जरुर अच्छे चिट्ठाकार ही होंगे.

    सस्नेह -- शास्त्री

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
    http://www.Sarathi.info

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  9. रूझानों की आतुरता से प्रतीक्षा है।

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आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

 
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