अभी-अभी  अचानक साउथ एशिया टुडे के एडिटर साहब के एक मेल की प्रति मुझे प्राप्त हुयी है । यह मेल ब्लॉगर महिला रचना जी को संबोधित है और मुझे उसकी एक प्रति भेजी गयी है । उल्लेखनीय है कि रचना जी के द्वारा साउथ एशिया के एडिटर साहब को लिखे गए पत्र में मेरे ऊपर गंभीर इल्जाम लगाया गया है कि मैंने हिन्दी ब्लोगिंग का इतिहास पुस्तक में नाम छापने के एवज में ब्लोगरों से पैसे लिए  हैं और अब उनके द्वारा मांगने पर मेरे द्वारा वापस नहीं किया जा रहा है। 

एडिटर साहब के द्वारा रचना को दिये गए प्रतियुत्तर में यह कहा गया है, कि यदि यह इल्जाम सिद्ध नहीं हुआ  तो यह मान हानि के दायरे में आयेगा । 

प्राप्त मेल इसप्रकार है : 
---------- Forwarded message ----------
From: Editor South Asia Today <editor@southasiatoday.org>
Date: Sat, Apr 13, 2013 at 10:52 AM
Subject: Fwd: I object
To: Ravindra Prabhat <parikalpanaa@gmail.com>

---------- Forwarded message ----------
From: Editor South Asia Today <editor@southasiatoday.org>
Date: Sat, Apr 13, 2013 at 10:42 AM
Subject: Fwd: I object
To: रचना <indianwomanhasarrived@gmail.com>


Ms. Rachana ji,

The views and the script published in South Asia Today are the writer's own. and South Asia Today is not to be blemed for that. This letter of your had been forwarded to Mr. Prabhat & Mrs. Nazia Rizvi.

But here the charges framed against Mr. Prabhat are baseless that "He took the money and published the names of the bloggist and rest ware ignored who did'nt pay."

Charges framed by you if are not found to be true . Then may be you will find your self in the contempt of humanrights laws.  

Thanking You 
South Asia Today

Copy to : (1) Mr. Ravindra Prabhat 
               (2) Mrs. Nazia Rizvi


---------- Forwarded message ----------
From: रचना <indianwomanhasarrived@gmail.com>
Date: Fri, Apr 12, 2013 at 9:36 PM
Subject: I object
To: contact@southasiatoday.org


I strongly object to the contents of the above article 
I am the moderator of naari blog and Ravindra Prabhat is no authority on hindi bloging. 
He took money from people whose name he gave in the book he published on hindi bloggers and those who did not pay were ignored
regards 
rachna
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आप सभी से मेरा निवेदन है कि यदि कोई भी ब्लॉगर मेरी उस पुस्तक में नाम छपवाने के एवज में मेरे व्यक्तिगत खाते में पैसे स्थानांतरित किए हो अथवा मनीऑर्डर अथवा चेक / ड्राफ्ट भेजे हों तो प्रूफ के साथ अवश्य सूचित करें, ताकि इस कृत्य के लिए मैं शर्मिंदा हो सकूँ । हाँ एक निवेदन और है कि यदि इस पुस्तक में नाम छपवाने के एवज में मेरे नाम पर यदि किसी और के द्वारा धन उगाही की गयी हो तो उसका भी प्रमाण दें । 

मैं जानता हूँ कि ऐसा कोई भी प्रमाण  है ही नहीं । आपसे एक और निवेदन है कि अपना मन्तव्य भी दे कि इस प्रकार के आक्षेप के लिए संबन्धित व्यक्ति पर क्या मुझे मान-हानि का मुकदमा दायर करना चाहिए ? 

22 comments:

  1. ..यह तथ्य 'नारी-नारी' का झंडा बुलंद करने वाले देख लें,शायद अब भी उनकी आँखें खुल जाएँ.
    .
    .भले ही कोई कितना निकट हो,पर यदि उसके कृत्य समाज और आपसी भाईचारे के विरुद्ध हैं तो उसकी निंदा ही करनी चाहिए.
    .
    .कई मौकों पर ऐसा साबित हो चुका है,जब 'नारी' को महज़ दूसरों पर छींटाकशी और नकारात्मकता बताने-बढ़ाने के लिए प्रयोग किया गया है.
    आप इस संबंध में जो भी उचित कार्रवाई हो करिये क्योंकि यह व्यक्तिगत मानहानि तो है ही,हिंदी ब्लॉग-जगत प्र भी धब्बा है.

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  2. लोग अपने कार्य से अलग किस उधेड़बुन में हैं !!! बहुत दुखद है = किताब के पैसे देना या साहित्य में अपना योगदान देना पैसे माँगना है तो ऐसी सोच के साथ कुछ नहीं कर सकते ...... मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ है , ना ही रवींद्र जी ने ऐसा कुछ कहा है .

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  3. इसी नकारात्मकता और बिना तथ्यों की बात करने के कारण रचना और फुरसतिया की छवि हिन्दी ब्लोगजगत मे अच्छी नहीं है। नारी ब्लॉग को पसंद न करने का एक कारण यह भी है ।

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  4. हा हा, गजब का आरोप है। नाम छपवाने के लिये पैसे लेना! आरोप लगाने वाले की बुद्धि पर तरस आता है। हम हैरान हैं कि ऐसे नकारात्मक ब्लॉग को पुरस्कार हेतु नामांकित किया गया है।

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  5. कैेसे-कैसे हास्यास्पद लोग भी हैं दुनिया में ...(कुछ कहते भी नहीं बन रहा)

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  6. सरासर गलत इल्जाम है, हमसे तो किसी ने पैसे नहीं लिए। हां ब्लॉगिंग का इतिहास पुस्तक खरीदनी है पैसे देने पड़ेगें, मुफ़्त में तो नहीं मिलेगी। तथा यह समझ में नहीं आया कि डाचाबेले ने इन ब्लॉगों को नामांकित किस आधार पर किया है। हजारों स्तरीय ब्लॉग हैं जो प्रमाणिक और स्वरचित सामग्री के साथ तथ्य परक हैं। उनका तो कहीं जिक्र नहीं है।

    निराधार आरोप नहीं लगाना चाहिए।

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  7. मुझे नहीं पता कि हिन्दी ब्लागिंग का इतिहास पुस्तक में मेरे ब्लागों के नाम हैं या नहीं। लेकिन साउथ एशिया टुडे में छपे रविन्द्र प्रभात जी के साक्षात्कार में मेरे एक ब्लाग तीसरा खंबा का उल्लेख किया गया है। परिकल्पना में छपे विश्लेषण में इस ब्लाग के साथ अनवरत का नाम भी था। मैं ने उन्हें कोई धन नहीं दिया। यहाँ तक कि पुस्तक खरीदने के लिए कोई अग्रिम भी नहीं दिया। दिल्ली समारोह के समय मैं पुस्तक खरीदना चाहता था लेकिन मिली नहीं। बाद में उक्त पुस्तक को मैं ने सीधे प्रकाशक से मंगाई। मुझ से कभी किसी ने कोई धन नहीं लिया। न मैं ने कभी कोई धन किसी को मेरे ब्लागों के प्रचार प्रसार के लिए दियाॉ। मैं ने अपनी वकालत के 33 वर्षों में कभी कोई धन किसी काम को कराने, या जल्दी कराने, अपने या अपने किसी मुवक्किल के पक्ष में कराने के लिए नहीं दिया। न देने की कोई सिफारिश की। मैं समझता हूँ कि रविन्द्र प्रभात जी पर लगाया गया यह आरोप मिथ्या है।
    इस का एक पहलू और भी है यदि कोई यह आरोप लगाता है कि उस से उस के या उस के ब्लाग का नाम प्रमोट करने के लिए धन लिया गया और अब वापस नहीं दिया जा रहा है। क्या इस तरह के कार्य के लिये धन देना उतनी ही बड़ी अनैतिकता नहीं है जितनी बड़ी इस तरह से धन लेना है?
    मेरे विचार में ब्लाग को इस तरह से प्रमोट करने के लिए धन कोई क्यों देगा जब कि उस से बहुत कम धन में गूगल के एडवर्ड से काम लिया जा सकता है जो मेरी समझ में किसी ब्लाग को प्रमोट करने का सर्वोत्तम तरीका है।

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  8. बेहद शर्मनाक।

    आदरणीय दिनेश राय द्विवेदी जी की टिप्‍पणी से सारी स्थिति स्‍पष्‍ट हो गयी है।

    मुझे जावेद अख्‍तर जी का एक शेर याद आ रहा है:


    नम आवाज़, भली बात, मुहज्‍जब लहज़ा,

    पहली बारिश में ये रंग उतर जाते हैं।


    आशा है, पानी पर चढ़ाने वाले पानी-पानी हो रहे होंगे।

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  9. क्‍या करिएगा रवींद्र जी, पूरी की पूरी टीम ही ऐसी है। इसीलिए तो मुझे कहना पड रहा है कि खुसदीप भाई, आप सफेद झूठ बोल रहे हो।

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  10. हमने भी कभी व्यक्ति को ब्लॉगिंग उत्थान/ प्रचार/ प्रसार/ सम्मान/ साक्षात्कार/ नामोल्लेख/ सम्मेलन के लिए कोई भुगतान नहीं किया
    एक बार किसी ने ऐसा ही इलज़ाम लगाया था मुझ पर
    बाद में अदालत के कमरे में पाँव छू कर माफी मांगी, तब मुक्ति मिली थी उसे

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  11. इसका मतलब ये निकाला जाये कि उस पुस्तक में जिन ब्लॉगर्स का नाम है, उन सबने नाम दर्ज करवाने के पैसे दिये हैं?

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  12. such allegations are definitely aimed to tarnish the image of targeted person. I can't imagine even in dreams that Ravindra ji would have resorted to such an unethical practice of collecting money from bloggers for including their names in a book on blogging written by him. Such blame game is very unfortunate and I strongly condemnt it.

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  13. अब तो यह लगने लगा है कि इस ब्लॉग जगत मे शांति नहीं रह सकती ... किसी न किसी मुद्दे को पकड़ कोई न कोई विवाद होता ही रहता है !
    वैसे एक तरह से अच्छा भी है ... लोग बाग पोस्टें पढ़ना शुरू कर देते है ... लिखना शुरू कर देते है ... बहुत से ब्लोगों पर तालें लग जाते है ... बहुतों के खुल जाते है ! कुल मिला कर लोग सक्रिय हो जाते है !

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  14. पुस्तक बिक्री के सम्बन्ध में
    कमाई का अर्थ यहाँ पैसे की बचत से कमाई यानि अ पेनी सेव्ड इज अ पेनी अरंन्ड से है -
    और नाम का आमेलन पुस्तक मूल्य से अधिक नहीं होगा
    मेरी अल्प बुद्धि से तो यही मतलब निकलता है !

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  15. Now my gut feeling is to forward an advance congratulation to Tasliim as a winner of Bobs prize-Nari seems to have lost the battle as it has now relegated to level of unethical practices to win the prize and also has mobilized a clique to go for an unjust lobbying!
    There was no need of such tantrums!

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  16. निहायत गैर-जिम्मेदाराना । रविन्द्र प्रभात जी पर इस तरह के आरोप लगाना कि वे ब्लागिंग पर पुस्तकों के प्रकाशन में पैसे के लिए कोई डिमांड करते हैं, कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता है.

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  17. आलोचना से व्यक्तिगतता का सफ़र करने में यहां पर बहुत ज्यादा आतुरता दिखाई जाती है , ये जानते हुए कि शब्दों और बातों के अर्थ , अनर्थ और कई निहितार्थ भी निकाले समझे समझाए जा सकते हैं ।

    जो भी हो जहां तक कानूनी पहलू का सवाल है फ़िलहाल तक तो दोनों ही पक्ष ऐसे किसी भी दायित्व से मुक्त हैं किंतु अफ़सोसजनक ये है कि यदि ये दौर यूं ही चलता रहा तो पुरस्कार तिरस्कार से परे , मान अपमान और मानहानि के मुकदमों और हर्जानों के किस्से भी दर्ज़ किए जाएंगे इन्हीं ब्लॉग पोस्टों में ।

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  18. बहुत दुखद है ये सब, फिर भी यही कहूँगी यह एक बहुत ही अच्छा अवसर मिला था हिंदी ब्लॉग्गिंग को अंतर्राष्ट्रीय मंच में मान्यता मिलने का, इसलिए सारी रंजिश छोड़ कर परिपक्वता दिखाते हुए, इस प्रतियोगिता में आगे बढ़ा जाए मेरी शुभकामना आप सभी चयनित ब्लोग्स के साथ है। सब ठीक हो जाएगा।

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  19. aisa bhi sambhav hai kya... ??
    aise aaropon se bachna chahiye..
    tabhi hindi ka bhala ho sakta hai ...

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  20. सार्थक और सटीक लेखन |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  21. कहने वाले कहते रहते हैं उन पर ध्यान देना बेबात का विवाद पैदा करना होता है और विवादों को जितना बढ़ाया जाएगा उतनें ही आगे बढते जायेंगे !!

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