किसी की संवेदनशीलता उसकी गरिमा,उसकी जीत,उसकी उपलब्धियां होती हैं - इन्हीं गुणों की स्वामिनी ऋता शेखर 'मधु' हैं  .... जो कहती हैं -
"ब्रह्म मुहुर्त में
कौंधा एक सवाल
कौन हूँ मैं ?
क्या परिचय है मेरा ?
सिर्फ एक नाम
या और भी बहुत-कुछ
वह, जो अतीत में थी
या जो अभी हूँ
या जो भविष्य में होऊँगी"  …वर्त्तमान भविष्य का आईना है, जिसमें जब हम जैसे दिखते हैं - वही अतीत से निकला भविष्य है,. 

ऋता शेखर 'मधु' का अपना ब्लॉग है 

१) मधुर गुंजन  http://madhurgunjan.blogspot.in/
२) हिन्दी हाइगा  http://hindihaiga.blogspot.in/   जिसमें उनके कलात्मक गुणों की अविस्मरणीय यात्रा है - उत्सव में प्रस्तुत है उनकी विशेषताओं की उत्कृष्ट झलकियाँ 











आज बस इतना ही, मिलती हूँ कल फिर 10 बजे परिकल्पना पर ......

12 comments:

  1. पारखी नजर ,ब्लॉग जगत के कोहिनूर चुन लाते ...

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  2. एक से बढ़कर एक हाइगा ...साथ में सम्बधित सुंदर चित्र
    वाह .....
    "कच्ची थी मिटटी ..." और "मिल के रहे दीप तेल ..." खासकर बहुत पसंद आये
    पहली बार इनसे मुलाक़ात हुई ...शुक्रिया रश्मि जी

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  3. ``ऋता शेखर एक चिरपरिचित नाम है और हाइगा प्रस्तुति उनका ख़ास काम है '' बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति। . बहुत-बहुत बधाई ऋता .....
    Dr Rama Dwivedi

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  4. आप के ब्लाग के अक्षर इतने बारीक हैं कि पढ़ना बहुत कठिन हैं । अक्षर बड़े नहीं होते ।

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  5. वाकई ऋता जी की लेखनी बहुत सुंदर कृति गढ़ती हैं ! शुभकामनाऐं !

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  6. किसी की संवेदनशीलता उसकी गरिमा,उसकी जीत,उसकी उपलब्धियां होती हैं - अक्षरश: सच कहा आपने ... इनकी लेखनी में ओज है इन्‍हीं गुणों का
    अच्‍छी लगी यह विशेष प्रस्‍तुति
    आभार

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