बुद्ध यानि मौन  … मौन अपने आप में एक निर्वाण है ! मौन ही जीवन के सूक्ष्म रहस्यों को खोलता है  . मौन ध्यान की ऊर्जा और सत्य का द्वार है . मौन से कुछ भी घटित हो सकता है ! एक तरह मन की शक्ति बढ़ती है, दूसरी तरफ मोक्ष मार्ग खुलता है  . 
मौन का यह अर्थ कदापि नहीं कि जबरदस्ती हम चुप रहें, मौन एक शांत प्रक्रिया है, जिसे मन की उथल-पुथल में अपनाना मन को विश्राम देना है और बंद रास्तों को खोलना है  … 
बुद्ध को जब बोध प्राप्त हुआ, तो कहा जाता है कि वे एक सप्ताह तक मौन रहे  .  उन्होंने एक भी शब्द नहीं बोला। पौराणिक कथाएं कहती हैं कि सभी देवता चिंता में पड़ गए  .  उनसे बोलने की याचना की  . मौन समाप्त होने पर वे बोले, जो जानते हैं, वे मेरे कहने के बिना भी जानते हैं और जो नहीं जानते, वे मेरे कहने पर भी नहीं जानेंगे  .  जिन्होंने जीवन का अमृत ही नहीं चखा, उनसे बात करना व्यर्थ है, इसलिए मैंने मौन धारण किया था  .  जो बहुत ही आत्मीय और व्यक्तिगत हो उसे कैसे व्यक्त किया जा सकता है?
बुद्ध के शब्द निश्चित ही मौन का सृजन करते हैं, क्योंकि बुद्ध मौन की प्रतिमूर्ति हैं  .  मौन जीवन का स्रोत है  .  जब लोग क्रोधित होते हैं, तो पहले वे चिल्लाते हैं और फिर मौन हो जाते हैं  .  जब कोई दुखी होता है, तब वह भी मौन की शरण में जाता है। जब कोई ज्ञानी होता है, तब भी वहांपर मौन होता है  . 
सत्य की तलाश मौन से शुरू होती है, प्राप्य के साथ औरा बुद्धत्व को प्राप्त करता है  . 

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          रश्मि प्रभा 


मौन


मौन के इस विस्तार में- 
डूबते उतराते न जाने कितने प्रश्न-
अपने निरुत्तर होने का बोझ ढो रहे हैं...
यह अनगिनत त्रिशंकु -
हमारे इर्द गिर्द इसी इंतज़ार में मंडराते हुए...
की कब कोई आह ...कोई सिसकी, इन्हें बींधे ..
और इन्हें मिल जाये एक आसमान.. या फिर एक ज़मीन ..
---जिसकी जो नियति हो!
और हम -
हर ख़ुशी, घंटों.... इसी मुद्रा में गवां देते हैं -
पल..घंटों में...
घंटे प्रहारों में..
और प्रहर...दिनों... हफ़्तों ...महीनों में 
परिवर्तित हो जाते हैं...
लेकिन यह मौन..
जस का तस-
बींधे जाने के इंतज़ार में-
और विस्तार पाता जाता है.


सरस दरबारी 
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मौन

मौन नहीं स्वीकृति हार की
मौन नहीं स्वीकृति गलती की,
मौन नहीं है मेरा डर 
और न ही मेरी कमजोरी,
झूठ से पर्दा मैं भी उठा सकता हूँ
और दिखा सकता हूँ आइना सच का,
लेकिन क्यों उठती उंगली 
सदैव सच पर ही,
होता है खड़ा कटघरे में
और देनी पड़ती अग्नि परीक्षा 
सदैव सच को ही।

जब मुखर होता असत्य
और दब जाती आवाज़
सत्य की 
असत्य के शोर में,
हो जाता मौन 
सत्य कुछ पल को।
सत्य हारा नहीं 
सत्य मरा नहीं 
केवल हुआ है मौन 
समय के इंतज़ार में।


कैलाश शर्मा 
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मौन ...

मौन क्या है ... दूरियाँ पाटने वाला संवाद या समय के साथ चौड़ी होती खाई ... और संवाद ... वो क्या है ... महज़ एक वार्तालाप ... समझने समझाने का माध्यम ... या आने वाले सन्नाटे की और बढता एक कदम ... शायद अती में होने वाली हर स्थिति की तरह मौन और संवाद की सीमा भी ज़रूरी है वर्ना गिट भर की दूरी उम्र भर के फाँसले से भी तय नहीं हो पाती ...

चादर तान के नींद का बहाना ...

तुम भी तो यही कर रही थीं

छै बाई छै के बिस्तर के बीच मीलों लंबी सड़क
मिलते भी तो कैसे
उलटे पाँव चलना आसान कहाँ होता है

कभी कभी मौन गहरे से गहरा खड्डा भर देता है
पर जब संवाद तोड़ रहा हो दरवाज़े
पड़ोस कि खिड़कियाँ 
तो शब्द वापस नहीं लौटते

सर पे चोट लगनी ज़रूरी होती है
हवा में तैरते लम्हे दफ़न करने के लिए
और सच पूछो तो ये चोट
खुद ही मारनी होती है अपने सर

ज़िंदगी बर्फ नहीं होती कि पिघली और खत्म
अपने अपने शून्य के तापमान से
खुद ही बाहर आना होता है ...

मौन की गहरी खाई
आपस के संवाद से ही पाटनी पड़ती है ...

मेरा फोटो



दिगम्बर नासवा

9 comments:

  1. बहुत सुन्दर...मेरे मौन को भी स्थान देने के लिए आभार...

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  2. सरस जी और कैलाश जी ने बहुत विस्तार दिया है मौन को और बाखूबी शब्दों में उतारा है ...
    मेरे मौन को भी स्तान देने का आभार ...

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  3. मौन की अपनी ही एक अलग भाषा है (h)

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  4. मौन मुखर हो उठा ब्लॉगोत्सव में
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति ..

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  5. रश्मिजी मेरे मौन को स्वर देने के लिए ....उसे इस योग्य समझने के लिए ...उसे अपने ब्लॉग पर स्थान देने के लिए ......आभार .....:)

    कैलाशजी और दिगंबर जी की सोच बहोत सशक्त और सुन्दर लगी

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  6. सभी 'मौन' बोल रहे हैं..अपने-अपने अंदाज़ में अद्भुत, निराले !
    * सत्य की तलाश मौन से शुरू होती है, प्राप्य के साथ औरा बुद्धत्व को प्राप्त करता है .
    * बींधे जाने के इंतज़ार में-
    और विस्तार पाता जाता है.
    * सत्य मरा नहीं
    केवल हुआ है मौन
    समय के इंतज़ार में।
    * ज़िंदगी बर्फ नहीं होती कि पिघली और खत्म
    अपने अपने शून्य के तापमान से
    खुद ही बाहर आना होता है ...
    वाह, अगर 'मौन' का यह संवाद है, तो यह मुखरता अद्भुत है ! सभी को बहुत-बहुत बधाई ! :)

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  7. क्या बात है . क्या शानदार पोस्ट है . आहा . पढ़कर आनंद छ गया मन पर .
    बहुत बहुत आभार आप सभी का !
    प्रणाम

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