क साठ वर्षीय नेत्रहीन व्यक्ति,
जो शायद रास्ता भूल गया था,
एक सुनसान सड़क पर अकेला चला जा रहा था ।
राह में खड़ी एक दीवार पर छड़ी लगाकर बोला
क्या आस - पास कोई है ?
पास में उपस्थित नारी ने कहा - बाबा कहाँ जाना है ?
नेत्रहीन बोला - बेटी गली नम्बर ७ का रास्ता बता दो,
अगर हो सके तो मोड़ तक ही पहुँचा दो ॥
तभी पास की मस्जिद पे खड़े व्यक्ति की
इस वाकिये पे पैनी नजर पड़ी
वह व्यक्ति चिल्लाया - काफिर मुस्लिम लड़की छेड़ता है
अकेला देखकर रास्ता रोकता है ।
बस ज़रा से देर में सड़के खून से लाल थीं,
शहर में देखते ही गोली मरने के आदेश थे ।
क्योंकि शहर में मज़हबी तूफान उठ चुका था,
भावनाओं का कौम से गला घुट चुका था ।
मन्दिर तोडे जा रहे थे, मस्जिदे उखाडी जा रही थीं,
इंसानों द्वारा इंसान की शक्ले बिगाड़ी जा रहीं थीं ।
दोनों धर्मों की अलग - अलग सभाएं हो रहीं थी
किसको मरना है की चालें नियोजित हो रहीं थी
उस नेता का घर तो दौलत से तालाब हो गया था
पर लथपथ लाशों को गिनना बेहिसाब हो गया था ॥
हर तरफ से जख्मियों की कराह आ रही थी,
उनमें से उस नेत्रहीन की भी सदा आ रही थी,
वह दुआ थी , शिकायत थी, या शुक्रिया था
शोर में ये तो समझ नहीं आ रहा था
पर बार - बार वो यही कहे जा रहा था ।
अच्छा हुआ भगवान जो तुने मुझे आँखे नहीं दी,
इससे अच्छा तो ये होता की कान भी न देता,
ताकि मैं, भावनाओं की कराहें तो न सुन पाता
बेवजह मरने वालों की आहें तो न सुन पाता
अंत में दोनों हाथों को मिलकर , वो बोला चिल्लाकर
सबका भला कर , प्रभु सबका भला कर ॥


@दीपक शर्मा




आने वाली प्रतीक्षा

सा लग आने पर भी कि शाम अँधेरे से घिरने को है वह उसके आने की प्रतीक्षा करता रहता। वहीँ प्रतीक्षा के मुहाने पर खड़ा हो प्रतीक्षा करते रहना न जाने उसने कहाँ से सीखा था। या कि शायद समय के प्रवाह के साथ बहते बहते वह स्वंय ही इसका आदी हो चुका था . 

और जब लड़की आती तो वह हमेशा उससे कहती "मैं हमेशा इंतज़ार कराती हूँ ना" और लड़का उसके इस तरह कहने पर चुप हो जाता . प्रारंभ के दिनों में लड़का उससे कहा करता कि "नहीं तो". बाद के दिनों में वह उत्तर दिए बिना ही कह देता और लड़की उसके बोले बिना ही उस उत्तर को सुन लेती।  

लड़की कभी उससे न पूछती कि उसने उस बीते हुए समय में क्या किया . जबकि वह अपने दफ़्तर में थी और वह यहाँ उस समय के एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाकर  वापस आता हुआ, उन प्रतीक्षा की सुइयों का टिकटिकाना  गिना करता . शायद उन दोनों के मध्य कई सारे ऐसे प्रश्न थे जो कभी कभी लगता की जानबूझ कर या तो किये नहीं  या उन्हें टाल दिया गया . 

लड़का हर रोज़ सोचता कि यदि किसी एक रोज़ वह उससे पूछ बैठी कि उसके आने से पहले उसने क्या क्या किया ? तो वह उसे क्या उत्तर देगा . कभी कभी उसका सारा दिन उन्हीं उत्तरों की  खोज़ में बीत जाता . और कभी कभी वह उन प्रश्नों के बारे में सोच सोच कर समय बिता देता जो कि कभी पूछे नहीं गए किन्तु पूछे जा सकते थे .

वह उसे कभी कभी बताना चाहता कि आज दोपहर भर उसने उस बगीचे में बैठे प्रेमी युगल को देखा जो सुबह से शाम  वहाँ था और उसके आने से पहले वहां से चला गया . किन्तु वह उसका चाहना भर होता क्योंकि तब उसे यह भी बताना होता कि उसके पीछे उसकी प्रतीक्षा करना आसान है या कठिन . और यही सोच कर वह उस प्रेमी युगल को अपनी स्मृतियों से क्षण भर के लिए भुला देता . किन्तु वे वहीँ रहते . एक नए दिन में उसकी प्रतीक्षा में मददगार  बनने के लिए . 

और कभी कभी वह सोचता कि यदि वह उसे बताएगा कि सिनेमा के पोस्टरों को देखना उसका शौक है तो क्या वह उसके शौक पर हँसेगी या कहीं ऐसा तो नहीं कहेगी कि पोस्टरों को देखना भी भला कोई शौक हो सकता है . किन्तु वह जानता था कि पोस्टरों की भी अपनी एक दुनिया है . वह कैसे बताता कि फिल्म को देखे बिना वह पोस्टरों से उन फिल्मों की कहानियाँ बनाना भी उसका अपना शौक है . वह प्रतीक्षा के क्षणों में कई कई बार ऐसा करता . और जब कभी लड़की उससे वह फिल्म देखने का प्रस्ताव रखती तो वह कोई न कोई बहाना बना कर उसे टाल देता . वह नहीं चाहता था कि उसकी सोची हुई कहानी के विपरीत कोई और कहानी निकले . और यदि वही कहानी निकली जो कि उसने सोची थी तो फिर उसे फिजूलखर्ची महसूस होती . वह ऐसी कोई फिल्म देखना चाहता था जो कि उसने देख कर भी न देखी हो .

कभी कभी वह उन प्रतीक्षा के क्षणों में इतना सुख भोगने लगता कि लड़की उसे आकर जताती कि वह आ गयी है . और तब वह अँधेरा और भी घना हो जाता। बीते हुए दिन के धब्बे कहीं कहीं उभर कर उसके सामने आ जाते .

और वह एक नए दिन की प्रतीक्षा में उस आने वाली रात को बिता देता .....

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अनिल कान्त
http://meraapnajahaan.blogspot.in/






समय है एक विराम का, मिलती हूँ एक छोटे से विराम के बाद...... 

1 comments:

  1. अंधा होना भी कभी अच्छा होता है
    देखना वो सब कुछ नहीं होता है
    जिसे देखना जरूरी नहीं होता है
    इंतजार सभी को करना होता है
    किसी को सुबह का और
    किसी को शाम होने का होता है :)

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