हाइकु मूल रूप से जापानी कविता है। आज हाइकु जापानी साहित्य की सीमाओं को लाँघकर विश्व साहित्य की निधि बन चुका है।
हाइकु कविता तीन पंक्तियों में लिखी जाती है। हिंदी हाइकु के लिए पहली पंक्ति में ५ अक्षर, दूसरी में ७ अक्षर और तीसरी पंक्ति में ५ अक्षर, इस प्रकार कुल १७ अक्षर की कविता है। हाइकु अनेक भाषाओं में लिखे जाते हैं ;लेकिन वर्णों या पदों की गिनती का क्रम अलग-अलग होता है। तीन पंक्तियों का नियम सभी में अपनाया जाता है।
श्रीमती ऋता शेखर 'मधु' एक शिक्षिका हैं, और इस दिशा में इनके कदम प्रशंसनीय हैं - 

सात हाइकु -- ऋता शेखर 'मधु'

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१.
चादनी रात
उतरा कचनार
मेरे अँगना|
२.
पहाड़ी दिल
झरनों में धड़का
प्रेम में रमा|
३.
कंक्रीट पथ
पगडंडी जा मिली
पत्थर बनी|
४.
अल्ट्रा साउण्ड
फिर उठी ललक
बेटी या बेटा|
५.
कोमल जिह्वा
चलाते शब्द-बाण
ब्रम्हा की माया|
६.
शोख़ अदाएँ
बेखौफ़ अल्हड़ता
खा गई धोखा|
७.
नभ की छाँव
नर्म दूब बिछौना
दीनों का सुख|

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