विश्लेषण-2007
कुछ खट्टा - कुछ मीठा है ,
ब्लॉगजगत का हाल !
आओ तुम्हें सुनाएँ ,
कैसे बीता साल !!
कहीं राड़- तकरार था , कहीं प्यार - इजहार ! तोल-मोल में व्यस्त थे , हिन्दी -चिट्ठाकार !!
खूब लुटाये "ज्ञान" ने , ज्ञान का अक्षय कोष !
और "सारथी" ने किये , हिन्दी का जयघोष !!
कहीं हास व व्यंग्य है , कहीं तकनिकी ज्ञान !
ब्लोगर के घर हो रहे , नित्य नया संधान !!
ब्लॉगजगत में "तश्तरी" , बनकर के अपबाद !
घूम रहे हैं आजकल , भारत में निर्बाध !!
" चिट्ठा " नए कलेवर में , यत्र-तत्र- सर्वत्र !
"अलोक" ढूँढते रह गए , हिन्दी मापक यंत्र !!
कांव- कांव "काकेश " के , कभी न माने हार !
नए शोध में व्यस्त हैं , अपने " अमर कुमार "!!
अजब यहाँ संयोग है , शब्द- शब्द में प्यार !
"महावीर " की साधना , "ममता" का शृंगार !!
कहीं "अनिता" दर्शन में , कहीं "साध्वी '' संग !
"मीनाक्षी" ने मिला दिए , चिंतन में हीं भंग !!
मोती को खंगाल के , फेंक रहे हैं सीप !
बाँट रहे हैं रोशनी , " दीपक भारतदीप " !!
"रवि रतलामी " ने मियाँ , खूब जमाये रंग !
शब्द-शब्द साहित्य में , सम्मानों के संग !!
"परमजीत" की जीत हुई , फिर से आये "राज"
फिल्म समीक्षा कर-करके , व्यस्त हुए "दिव्याभ"!!
संवेदन - संसार में , हास बना हथियार !
लगा रहा " ठहाका "है , मुम्बई वाला यार !!
वर्ष -२००७ में चिट्ठाजगत की गतिविधियों पर , हमारा यह काव्य विश्लेषण अगले पोस्ट में भी जारी रहेगा । इस विश्लेषण के पीछे किसी भी प्रकार का पूर्वाग्रह अथवा दुराग्रह नही है ,बल्कि केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रकाशित किया जा रहा है , यहाँ मैं यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि कोई भी ब्लोगर भाई इसे अन्यथा न लें !क्योंकि-
"लिए विशद बिषाद - हर्ष !
बीत गया स्मृतियों का वर्ष !! "
() रवीन्द्र प्रभात

6 comments:

  1. भाई रविन्द्र प्रभात जी,हिन्दी चिट्ठाकारों का अच्छा काव्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया हॆ.मेरी ओर से बंधाई.आपकी काव्यात्मक प्रतिभा को मानना पडेगा.उम्मीद हॆ,अभी इस एपीसोड की कई किस्तें ऒर आयेंगी.वॆसे तो कोई बुरा मानने वाला नहीं हॆ,लेकिन किसी खास चिट्ठाकार का नाम यदि आपकी हिट-लिस्ट में आने से रह गया तो....

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  2. बहुत बढिया!!काव्यात्मक विश्लेषण किया है ...हमे भी शामिल किया इस के लिए आभार।

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  3. ब्लॉगजगत में परस्पर बन्धुत्व का आधार ब्लॉग लिंकिंग है। उसमें अगर कविता के माधुर्य का समावेश हो जाये तो सोने में सुहागा। आपने वही किया है।
    साधुवाद।

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  4. बहुत खूब जी,छा गये आप तो. इस उत्तम विश्लेषण के लिये आभार.

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  5. सबकी बातें सबका जिक्र अच्छा है ये काम
    हम भी खुश कि आपने लिया हमार नाम
    जारी रखें इसी तरह आप ये अपनी चर्चा
    रंग चोखा आता रहे होये नहीं कोई खर्चा

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  6. बहुत बढ़िया रेखाचित्र ...

    किया अभी तो हमने चिंतन में हीं भंग
    लिख दूँ या न लिख दूँ मन में होती जंग
    जी तो चाहता है हम भी रंग जाएँ सबके रंग
    नववर्ष में शायद हम कदम बढ़ाएँ सबके संग!!

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