आज चुनावी महासमर का पहला पड़ाव पूरा हुआ , सारे राजनीतिज्ञ दूसरे पड़ाव की ओर कूच कर गए ...... और धरी की धरी रह गयी गरीबी ...अब पाँच साल के बाद ही उन क्षेत्रों में होंगे प्रभु के दर्शन .....यही है भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा आकर्षण । किसी ने ठीक ही कहा है, कि यदि भारत में गरीबी नही होती तो नेताओं का वजूद नही होता और जब तक गरीबी रहेगी नेताओं का वजूद रहेगा ......कमबख्त गरीबी बड़े काम की चीज है । अब भला आप ही बताईये कि काम की चीजों का भी कोई त्याग कर सकता है ? नही न ? तो फ़िर नेता क्यों करे ?

इस चुनाव में बहुत ही अजीब बात जो देखने को मिली वह यह कि छोटा हो बड़ा कोई भी दल हो , उसे केवल दो ही चीजों से प्रेम रहा एक- प्रधान मंत्री की कुर्सी से और दूसरी गरीबी से ....प्रत्येक दल के नेता ख़ुद को प्रधान मंत्री के रूप में महिमामंडित करते हुए मिले या फिर गरीबों के मसीहा घोषित करते हुए ......अब भाई जब चुनावी गठजोड़ का युग है तो प्रधान मंत्री से नीचे का पद क्यों लिया जाए ? भला बताईये हूजूर ! गंगा नहाने में किसको आनंद नही आता ? जब प्रधान मंत्री पद की लूट है तो लूटने में क्या हर्ज़ ?

हमारे गाँव के धरीछन मिसिर भी सांसद बनने के लिए इस बार अपनी नई कुर्सी पकड़ पार्टी बनायी है और कहते हैं कि यदि इस बार जीत गया तो हो सकता है मैं भी प्रधान मंत्री बन जाऊं ....लोगों ने पूछा कैसे ? तो उन्होंने कहा देखो बिना गठ्बंदन के सरकार बनेगी नही ....हो सकता है है कमजोर प्रधानमन्त्री के नाम पर सहमति बन जाए और मैं भी .......बन जाऊं ! जब सब के सब अपने मुंह मियाँ मिट्ठू हैं तो मैं क्यों नही ? इस बात से अगर सबसे ज्यादा आपत्ति किसी को है तो वह है अकलू बैठा ... ! अकलू बैठा धरीछन मिसिर के अपोजिट में खड़े हुए हैं ,कहते हैं धरीछन सपना देख रहे हैं प्रधान मंत्री तो मैं ही बनूंगा ......जब कमजोर प्रधान मंत्री ही बनने की बात होगी तो मुझसे ज्यादा कमजोर कौन है इस देश में .....कई दफाओं में वांछित होने के कारण मुझे तो सबके तलवे चाटने है .....यानी जो सबका चहेता होगा वही प्रधान मंत्री बनेगा ।

हमारे यहाँ की एक और प्रत्याशी है राम प्यारी , कहती है अगर प्रधान मंत्री पद किसी महिला को मिला तो निश्चित रूप से मुझे ही मिलेगी ! अभी-अभी मैं विदेश भ्रमण कर के आई हूँ और यदि मुझे बना दिया गया प्रधान मंत्री तो मैं भी विदेशी चश्में से भारतीय गरीबी को देखने का प्रयास करूंगी ! लोगों ने पूछा मेमसाहब ! आपकी पास तो पासपोर्ट है हीं नहीं फिर विदेश घूम कर कब आ गयीं ? हमारी राम प्यारी यह सुनकर बड़े अनोखे अंदाज़ में कहती है - " अरे नेपाल विदेश नहीं है तो का है ? धरिछन और अकलूआ तो वहां भी नहीं घूमा होगा ......!"

हम तो इस वार संसद में यह प्रस्ताव रखने वाले हैं कि यदि गठबंधन में २८ दल हैं तो २८ प्रधान मंत्री बनाओ ! हर राज्य से एक और यदि एक राज्य से दो उम्मीदवार हो जाए तो लौटरी निकाल दो यानी हेड-टेल कर लो . क्या फर्क पङता है ? अरे भैया चूं-चूं का मुरब्बा है , मिल बाँट कर खाओ , मतभेद रहेगा ही नहीं ..../

जहाँ तक भारतीय गरीबी का प्रश्न है तो यह अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है , यह ऐसी गाडी है जिसका कभी पेट्रोल ही नही ख़त्म होता । भाई मेरे , अपना तो एक ही सिद्धांत है - गरीबों की सुनो मगर गरीबी महसूस न करो । वादा करो मगर उसे पूरा न करो । जब तक गरीबों का वजूद है , हमारे पीछे ध्वज लेकर चलने वाला समूह है .....यानी कि अगर मिटानी ही है तो गरीबी नही बच्चा , गरीबों को मिटाओ ......इतना कहकर हमारे नेता जी ने एक शेर उडेल कर आगे चल दिए .......पता नही अब कब आयेंगे हमारे दरवाजे ....एक साल -दो साल या पाँच साल पता नही ......पता नही ....अरे हां , आप भी सुन लीजिये वह शेर जिसे महिमामंडित करते हैं हमारे नेता जी -

"इस अंगीठी तक गली से कुछ हवा आने तो दो ।

जब तलक खिलते नहीं ये कोयले देंगे धुंआ । । "

7 comments:

  1. "इस अंगीठी तक गली से कुछ हवा आने तो दो ।
    जब तलक खिलते नहीं ये कोयले देंगे धुंआ ।

    प्रभात जी
    सही लिखा है...........इस शेर में पूरा दर्शन उडेल दिया

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  2. चुनाव में गरीबी की नुमाईश से मन में एक अजीब पीडा का भाव आता है ,पर सवाल यह उठता है की आखिर इसे समूल नष्ट करने हेतु आयेगा कौन ?सही लिखा है.../

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  3. सबसे बड़ा सच यह है ,कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से आज तक हर छोटे-बड़े दल के द्वारा भारत में गंदी और बजबजाती झोपडी के अस्तित्व को बचाए रखने की कोशिश की जाती रही है ताकि वोट बैंक कायम रहे ......वाह रे भारतीय लोकतंत्र और इस लोकतंत्र के सिपाह सालार ......बस जय हो -जय हो गाते जाते हैं और वोट बैंक बढाते जाते हैं .....आपका व्यंग्य अत्यंत ही सटीक है , बधाईयाँ !

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  4. अत्यंत सटीक व्यंग्य , बढिया अदायगी.....बढिया रोमांच ....धन्यवाद !

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