जब उत्सव की शुरुआत हुई तो रश्मि प्रभा ने कहा-
"समय तुम्हारी क्या बात ... तुमने तो पूरे काल को हमारे आगे रख दिया.
तुम्हारे गर्भ से निःसृत हर साज हमें मुग्ध कर रहे हैं .......
मधुर आरम्भ है ये तो , समय तुम जिसके सहचर बने हो -
उसे बधाई यह उत्सव समय का सशक्त इतिहास बनेगा ."
 
 
प्रवीण पाण्डेय ने कहा- "अभिनन्दनीय प्रारम्भ" ...आकांक्षा ने कहा- "वाकई यह समय ब्लॉग-उत्सव में खोने का है...बधाइयाँ !!" अदा ने कहा- "इस प्रयास की जितनी तारीफ की जाए कम होगी ...." हिमांशु ने कहा- "अभिनव उत्सव का अभिनव श्रीगणेश ! रचनात्मकता का नया आयाम ! " नीरज गोस्वामी ने कहा-"अद्भुत आरम्भ है रविन्द्र भाई..आपने अपना ही नहीं हम सब का सपना साकार किया है..." और आकांक्षा ने कहा- "बहुत खूब..उत्सव अपने शवाब पर है...बधाइयाँ !! "
 
और अजय कुमा झा ने इसकी एक विस्तृत चर्चा  की अपने इस पोस्ट में
 
पारुल और अदा ने कार्यक्रम का आगाज क्रमश: गणपति और वाणी वन्दना से किया ,पहले दिन देश के प्रख्यात चित्रकार इमरोज उपस्थित थे, इमरोज के दो रेखाचित्र और इमरोज के प्रति रश्मि प्रभा की अभ्व्यक्ति पढ़ने को मिली . दुष्यंत के बाद देश के सर्वाधिक चर्चित ग़ज़लकार अदम गोंडवी उपस्थित हुए अपनी दो ग़ज़लों और शुभकामनाओं के साथ और सुनील डोगरा ने निर्मला कपिला की ग़ज़ल को स्वर दिया . ग़ज़ल गुरु पंकज सुबीर ने अपने स्वर में लेकर उपस्थित हुए एक प्यारी सी कविता, प्रख्यात चिट्ठाकार उन्मुक्त के विचारों से अवगत कराया रवींद्र प्रभात ने और ज्ञान दत्त पाण्डेय उपस्थित हुए हिंदी ब्लोगिंग में अपने अनुभवों को बयान करने हेतु .
 
और-
बच्चों का कोना में एक मासूम बच्ची पाखी उपस्थित हुई अपनी कविताओं और रेखाचित्रों के साथ . इस पोस्ट को काफी सराहा गया ....!
 
आगे की कहानी अगले चरण में आईये संस्मरण के बाद पढ़ते हैं रश्मि प्रभा की कविता  हमसफ़र ....यहाँ किलिक करें
 
जारी है उत्सव मिलते हैं एक विराम के बाद

2 comments:

  1. ....बेहतर प्रस्तुति , बधाईयाँ !

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाकई सशक्त है यह प्रयास और यह अपनी छाप कुछ इस कदर छोड़ेगा कि ----

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

 
Top