ग़ज़ल

लफ़्ज तोले बिना बात मत कहना
दिन को खामखाह रात मत कहना ।

दर्द है, नसीहत है, तजुर्बा भी-
ग़ज़ल को फ़कत जज़्बात मत कहना ।

जिंदगी एक सफ़र है दोस्त मेरे-
भूलकर भी कायनात मत कहना ।

खुशनसीबों को हीं मिलती है ये-
मोहब्बत को खैरात मत कहना ।

मदहोश होना फितरत -ए-इश्क है-
इसे शराबी कि हरकात मत कहना ।

दोपहर बन आशियाना फूंक दे-
उस घड़ी को तुम प्रभात मत कहना।
() रवीन्द्र प्रभात

3 comments:

  1. खुशनसीबों को हीं मिलती है ये-
    मोहब्बत को खैरात मत कहना ।
    na mohabbat ko khairat kahna
    mohabbat mein jo mile
    use poori kaynaat samajhna ......

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  2. दर्द है, नसीहत है, तजुर्बा भी-
    ग़ज़ल को फ़कत जज़्बात मत कहना ।

    खुशनसीबों को हीं मिलती है ये-
    मोहब्बत को खैरात मत कहना ।

    वैसे तो सारी ग़ज़ल ही लाजवाब है ... पर ये दो शेर बहुत पसंद आये ... खूबसूरत रचना के लिए बधाई स्वीकारें ...

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