वटवृक्ष के बीज 
जब सोच में पनपे थे 
तो सपने उसकी जड़ों जैसे दूर तक मजबूत थे 
मिटटी की अपनी तासीर थी 
जिसे गाँव की मीठी खुशबू के साथ 
मैंने रवीन्द्र प्रभात जी को दी ...
सपनों की उड़ान लम्बी ही नहीं 
बहुत ऊँची होती है 
पंखों की मजबूती में 
ब्रह्माण्ड की खोज - उसकी ताबीर होती है !
.....
धीरे धीरे 
वटवृक्ष की जड़ें फैलीं  
कल्पना से परिकल्पनाओं के आधार दिए 
कलमकारों को छांव मिली ...
...
शब्दों का सिंचन अद्भुत,अनोखा रहा  
माली बन 
मैंने और रवीन्द्र जी ने 
कई पौधे लगाये 
वृक्षों को आयाम दिए 
संभावनाओं के अनगिनत द्वार खोले 
....
थकान हुई 
दिल घबराया 
पर माथे पर उभरे 
छलछलाए स्वेद कणों की 
हमने परवाह नहीं की 
....
आज भी हमें परवाह नहीं सूखे की 
सुनामियों की 
खनकती गेहूं की बालियों जैसे रचनाकारों के संग 
हम हाज़िर हैं ..........
आपके लिए 
आपके पास 
आपके साथ ............  इजाज़त हो तो करें 1 दिसम्बर से हम अपनी और आपकी परिकल्पना की शुरुआत :)
प्रशंसक ना हों तो लिखने का अर्थ अर्थहीन होता है !

भावनाओं का क्रूज़ है - मित्र भाव के संग साथ चलते हैं न 



18 comments:

  1. पूरा सहयोग है इस काव्य-यज्ञ को |

    सादर

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  2. अभी तक के सफर की बहुत बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएँ..

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  3. भावनाओं का क्रूज़ है - मित्र भाव के संग साथ चलते हैं न
    क्रूज पर हम भी होंगेः)

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  4. रश्मि जी, ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आपकी परिकल्पना का यह वटवृक्ष सदैव यूँही फलता फूलता रहे ... और आपकी संकल्पनाएँ इसी प्रकार आकर लेती रहे,,,
    साभार

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  5. मिट्टी तैयार है
    बीज हाथ में हैं
    मन सिंचित है
    भावनाओं से
    फिर कैसी इजाज़त ?
    कैसा इंतज़ार ?
    लहलहाते खेत
    मन मोह लेते हैं
    कारवां बनता है
    लोग साथ हो लेते हैं
    क्रूज़ पर सफर की
    तैयारी है
    इस सफर में
    साथ शुभकामना हमारी है ...

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  6. प्रशंसक ना हों तो लिखने का अर्थ अर्थहीन होता है !

    भावनाओं का क्रूज़ है - मित्र भाव के संग साथ चलते हैं न .......

    बेशक !! शुभम शीघ्रम !!

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  7. अनेकानेक शुभकामनायें रश्मिप्रभा जी ! जिन रचनाकारों को इस वटवृक्ष की छाँह में थोड़ी देर भी विश्राम करने का अवसर मिला वे नयी स्फूर्ति, नयी चेतना और नयी प्रेरणा के साथ सृजन कर्म में रत होते गये ! आपके सपनों को और विस्तार मिले और इस कल्पतरु रूपी वटवृक्ष की जड़ें और मजबूत हों यही कामना है !

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  8. इच्छाशक्ति दृढ़ हो तो सफलताओं के द्वार देर-सबेर खुलते ही हैं। जड़ें और भी पुख़्ता हों, स्वप्न सत्य हों, लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहें इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ 1 दिस्सम्बर की प्रतीक्षा में ...

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  9. आपके इस प्रयास का बहुत-बहुत स्‍वागत है !
    बधाई सहित शुभकामनाएं !!

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  10. namaskaar rashmi ji
    sarthak raha aapka prayas ......safaltayen kadam chumne ko betab , shubhkamnao ke saath --shashi purwar

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  11. शुभकामनाएँ...और हम साथ है आपके

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  12. भावनाओं के इस क्रूज़ का बेसब्री से इंतज़ार है ....सच !!!!

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  13. ब्लॉग परिवार सदा साथ है .

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