दीप्ति नवल का व्यक्तित्व बहुआयामी है| वे कवयित्री और चित्रकार होने के साथ साथ एक कुशल छायाकार भी हैं| इसके अतिरिक्त उन्हें संगीत से भी बहुत लगाव है और वे खुद भी कई वाद्य यंत्र बजा लेती हैं| उनकी प्रकाशित पुस्तकों में लम्हा-लम्हा मील का पत्थर साबित हुई ... उसे पढना - लम्हे को जीने जैसा है !

अपनी ही ज़िन्दगी से कुछ रौशनी लिए हम अजनबी रास्तों से पहचान बनाते हैं = कलम को वादियों में डुबो लिखते हैं अभिनीत चेहरे से परे - 


अजनबी / दीप्ति नवल
अजनबी रास्तों पर
पैदल चलें
कुछ न कहें

अपनी-अपनी तन्हाइयाँ लिए
सवालों के दायरों से निकलकर
रिवाज़ों की सरहदों के परे
हम यूँ ही साथ चलते रहें
कुछ न कहें
चलो दूर तक

तुम अपने माजी का
कोई ज़िक्र न छेड़ो
मैं भूली हुई
कोई नज़्म न दोहराऊँ
तुम कौन हो
मैं क्या हूँ
इन सब बातों को
बस, रहने दें

चलो दूर तक
अजनबी रास्तों पर पैदल चलें।


कोई टाँवाँ-टाँवाँ रोशनी है / दीप्ति नवल

कोई टाँवाँ-टाँवाँ रोशनी है
चाँदनी उतर आयी बर्फ़ीली चोटियोँ से
तमाम वादी गूँजती है बस एक ही सुर में

ख़ामोशी की यह आवाज़
होती है…
तुम कहा करते हो न!

इस क़दर सुकून कि जैसे सच नहीं हो सब

यह रात चुरा ली है मैनें
अपनी ज़िन्दगी से अपने ही लिये

8 comments:

  1. दीप्ति नवल जी के जीवन के एक और पहलू से बहुत सुन्दर परिचय...आभार

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  2. padh kar maalum huaa ki dipti naval ji me bahumukhii pratibha hai .. तुम अपने माजी का
    कोई ज़िक्र न छेड़ो
    मैं भूली हुई
    कोई नज़्म न दोहराऊँ
    तुम कौन हो
    मैं क्या हूँ
    इन सब बातों को
    बस, रहने दें

    चलो दूर तक
    अजनबी रास्तों पर पैदल चलें।..very nice

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सार्थक प्रस्तुति आपकी अगली पोस्ट का भी हमें इंतजार रहेगा महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    अर्ज सुनिये

    कृपया आप मेरे ब्लाग कभी अनुसरण करे

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  4. तुम कौन हो
    मैं क्या हूँ
    इन सब बातों को
    बस, रहने दें

    चलो दूर तक
    अजनबी रास्तों पर पैदल चलें।
    शायद जिंदगी का अपरिहार्य मोड़ है
    latest postअहम् का गुलाम (दूसरा भाग )
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  5. दोनों ही कविताएँ बहुत खूबसूरत हैं .... दीप्ति नवल जी के इस रूप से परिचित करने के लिए धन्यवाद रश्मि जी!

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  6. आज की ब्लॉग बुलेटिन गर्मी आ गई... ब्लॉgग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  7. रश्मिजी...दीप्तिजी की नज्में पढ़ीं.....काफी हद तक गुलज़ार साहब की शैली नज़र आयी.....लगा जैसे उन्हीं की कोई नज़्म पढ़ रही हूँ...बहुत सुन्दर.... बहुत उम्दा ...नज्में और पोस्ट दोनों...:)

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  8. दीप्ती नवल जी से परिचित होकर अच्छा लगा..
    इनकी दोनों ही रचनाएँ अति उत्तम है...

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