लगन - वह विश्वास है 
जिसके आगे 
मंज़िल खुद अपने सधे कदम बढ़ाती है 
मंज़िल के इन क़दमों का 
अपनी आवाज के जादू से
कुहू गुप्ता ने स्वागत किया है 
बाँधा है सुरों में दसों दिशाओं को 
कुछ इस तरह - दो बातों में ,





मेट्रो टशन कुहू की आवाज में बढ़ती चाल में -



रौशनी - आत्मा तक बिखरेगी कुहू की आत्मा से निकली आवाज में 



कुहू गुप्ता
http://kuhoogupta.com/





समय है एक छोटे से विराम का, मिलती हूँ शीघ्र .....

3 comments:

  1. कुहू गुप्ता से यादगार मुलाकात प्रस्तुति के लिए आभार

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  2. रश्मि जी, इस प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ... मैं तो सर्प्राइज़ हो गयी ये देख के :)

    उत्तर देंहटाएं

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