खनऊ से प्रकाशित "परिकल्पना समय" (हिन्दी मासिक पत्रिका) और "परिकल्पना" (सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था) के संयुक्त तत्वावधान में प्रकृति की अनुपम छटा से ओतप्रोत दक्षिण एशिया का एक महत्वपूर्ण देश श्री लंका की  सांस्कृतिक राजधानी, आध्यात्मिक राजधानी  और  राजनीतिक  राजधानी क्रमश: कैंडी, नेगोंबों बन्दरगाह और कोलंबो   में दिनांक 23 से 28 मई 2015 तक पाँच  दिवसीय "पंचम अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन सह परिकल्पना सम्मान समारोह" का आयोजन किया जा रहा है।

इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह, आलेख वाचन,चर्चा -परिचर्चा में देश विदेश के अनेक साहित्यकार,चिट्ठाकार,पत्रकार,अध्यापक,संस्कृतिकर्मी,हिंदी प्रचारकों और समीक्षकों की उपस्थिति रहेगी। उल्लेखनीय है, कि ब्लॉग, साहित्य, संस्कृति और भाषा के लिए प्रतिबद्ध संस्था "परिकल्पना" पिछले चार वर्षों से ऐसी युवा विभूतियों को सम्मानित कर रही है जो ब्लॉग लेखन को बढ़ावा देने के साथ-साथ कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। इसके अलावा वह चार अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलनों का संयोजन भी कर चुकी है जिसका पिछला आयोजन भूटान  की राजधानी थिंपु और सांस्कृतिक राजधानी पारो में किया गया था ।

सम्मेलन का मूल उद्देश्य स्वंयसेवी आधार पर दक्षिण एशिया में ब्लॉग के विकास हेतु पृष्ठभूमि तैयार करना, हिंदी-संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना, भाषायी सौहार्द्रता एवं सांस्कृतिक अध्ययन-पर्यटन का अवसर उपलब्ध कराना आदि है।

इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी के तीन सत्र होंगे जिनके विषय है –"ब्लॉग के माध्यम से दक्षिण एशिया में शांति-सद्भावना की तलाश", " दक्षिण एशिया में भाषाई सद्भाभना और उत्पन्न समस्याएँ" तथा " दक्षिण एशिया में साहित्यिक-सांस्कृतिक आदान-प्रदान"। इसके अलावा सुर-सरस्वती और संस्कृति की त्रिवेणी प्रवाहित करती काव्य संध्या भी आयोजित होगी।

22 मई 2015  की रात्री 12.45 बजे समस्त प्रतिभागी  भारत के प्रमुख महानगर चेन्नई से कोलंबो के लिए वायु मार्ग से प्रस्थान करेंगे।

कोलंबो पहुँचने के पश्चात समस्त प्रतिभागी सड़क मार्ग से श्रीलंका की सांस्कृतिक राजधानी और दूसरा सबसे बड़ा शहर कैंडी (Kandy) के लिए प्रस्थान करेंगे। कंडी के शासकों ने ही बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया और इस नगर को एक पहचान दी। ऐसा माना जाता है कि गौतम बुद्ध के दन्त अवशेष भारत से चुरा कर यहाँ लाये गए थे ताकि उन्हें दुष्ट शासकों से संरक्षण प्राप्त हो सके। यह भी मान्यता है कि बुद्ध के दन्त अवशेष जहाँ भी रहेंगे, वहां समृद्धि रहेगी।

सिंहली के साथ साथ तामिल भी यहाँ की राजकीय भाषा है और लोग तामिल अथवा अंग्रेजी भी बोल लेते हैं। यहाँ के पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य युद्ध क्रीडा जैसे हैं, जिसमें संगीत और ढोलों का गजब सामंजस्य होते हैं। कंडी के बीचों बीच एक सुन्दर झील है, प्रसिद्द दन्त अवशेष मंदिर (डालडा मलिगवा) से लगी। विश्व भर में बौद्धों की यह पवित्रतम पूजास्थली है। कैंडी का एक दूसरा आकर्षण वहां से ५ मील दूर पेरादेनिया में स्थित राजकीय वनस्पति उद्यान (रोयल बोटानिकल गार्डेन) है जहाँ श्रीलंका के दुर्लभ से दुर्लभ पेड़ पौधों को संगहीत किया गया है। कहते हैं १५० एकड़ में फैले इस उद्यान की स्थापना कंडी के राजाओं के द्वारा १३ वीं सदी में किया गया था। बड़े पेशेवर एवं वैज्ञानिक तरीके से इस उद्यान की देख रेख की जाती है। यहाँ पेड़ पौधों की प्रजाति अनुसार अलग अलग खण्डों में विभाजित किया गया है। यहाँ आपको परंपरिक श्रीलंकाई संस्कृति, हिन्दू आर्किटेक्चर, स्पाइस गार्डेन, बैटिक फैक्ट्री, जेम शॉप तथा वूड करविंग फैक्ट्री आदि स्थलों के भ्रमण का अवसर प्राप्त होगा। रात्री में यहाँ सूर-सरस्वती और संस्कृति की त्रिवेणी प्रवाहित करती काव्य संध्या आयोजित की जाएगी।

*24 मई 2015 को सुबह समस्त प्रतिभागी नुअरा एलिया नामके एक हिल स्टेशन जाएँगे। यह कैंडी से ७० मील की दूरी पर है और अपने चाय बागानों के लिए प्रख्यात है। इसे श्रीलंका का स्विटज़रलेंड भी कहा जाता है। अंग्रेजों के जमाने में यह उनका आरामगाह हुआ करता था। कोलम्बो वासी भी गर्मी से बचने के लिए यहीं आते हैं। हिल स्टेशन के बहुत बड़े भूभाग में चाय बागान और सम्बंधित कारखाने हैं। एक बड़ी झील और सुन्दर उद्यान भी यहाँ के आकर्षण हैं। यहीं हमें सीता मैय्या के मंदिर (सीता एलिया) के भी दर्शन होंगे। इसे ही रामायण की अशोक वाटिका कहा जाता है। यहीं पर पवन पुत्र हनुमान ने अशोक वृक्ष के नीचे सीता मैय्या को ढून्ढ निकाला था। यहाँ हनुमान जी द्वारा छोड़े गए पद चिन्हों को भी देखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा मजेस्टिक वाटर फॉल का अनुपम आनंद समस्त प्रतिभागियों को प्राप्त होगा। शाम में समस्त प्रतिभागी कैडी वापस आ जाएंगे जहां वे परिचर्चा सत्र में शामिल होंगे।

*25 मई 2015 को सुबह समस्त प्रतिभागी कोलंबो के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां पूरे दिन का सम्मेलन सत्र होगा, जिसमें सारस्वत सम्मान, दो परिचर्चा सत्र, भारतीय संस्कृति को आयामीत करने वाली कला प्रदर्शनी, चित्र प्रदर्शनी तथा भारतीय लोकगीत की प्रस्तुति होगी। शाम में कोलंबो शहर के भ्रमण के पश्चात ग्रैंड दिनार होगा जिसमें समस्त प्रतिभागी श्रीलंकाई व्यंजन के साथ-साथ भारतीय व्यंजन का भरपूर लुत्फ़ ले सकेंगे।

*26 मई 2015 को सुबह नाश्ते के बाद नेगोंबों समुद्र तट के लिए समस्त प्रतिभागी प्रस्थान करेंगे। यह समुद्र तट श्री लंका का बेहद खूबसूरत तटों में से एक है, जहां आम तौर पर विश्व भर के सैलानियों के लिए छुट्टी बिताने हेतु एक बहुत अच्छी जगह है, जहां सुनहरी रेत के साथ रेस्तरां और क्लब हैं। यहीं रात्री विश्राम और समापन सत्र होगा।

*27 मई 2015 को सुबह नाश्ते के बाद समस्त प्रतिभागी कोलंबो शहर में तथा खरीददारी हेतु प्रस्थान करेंगे और शाम में कोलंबो एयरपोर्ट के लिए प्रस्थान कर जाएंगे। 

चेन्नई आने के बाद समस्त प्रतिभागी अपने-अपने गंतव्य की ओर सवय के साधन से प्रस्थान करेंगे । 

इस आयोजन को श्रीलंका में आयोजित करने के मूल उद्देश्य यह है कि सांस्कृतिक दृष्टि से भारत और श्रीलंका में कई समानताएं हैं । भारत से निकल कर बौद्ध धर्म जहां श्रीलंकाई संस्कृति में विलीन हो गया वहीं भारतीय नृत्य शैलियों का यहाँ व्यापक प्रसार हुआ । श्रीलंका के शास्त्रीय संगीत चीनी, जापानी, भारतीय ओर इंडोनेशिया के संगीत के बहुत समीप जान पड़ता है। यहां अनेकानेक नृत्य शैलियां हैं जो नाटक से जुड़ी हुई हैं। इनमें रामायण का महत्वपूर्ण स्थान है। इन कार्यक्रमों में भारी परिधानों और मुखोटों का प्रयोग किया जाता है। यहाँ अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग सम्मलेन आयोजित करने के पीछे पवित्र उद्देश्य है हिंदी संस्कृति को श्रीलंकाई संस्कृति के करीब लाना और हिंदी भाषा को यहाँ के वैश्विक वातावरण में प्रतिष्ठापित करना ।

ठहरने का स्थान: 
(1) कैंडी: पैनोरमा होटल (23 एवं 24 मई 2015)
(2) कोलंबो: कोणकोर्ड  ग्रांड (25 मई 2015) 
(3) नोगोंबों: ओएसिस बीच होटल (26 मई 2015) 

ध्यान दें: इसमें शामिल होने के लिए पासपोर्ट आवश्यक है।

जो प्रतिभागी इस आयोजन में शामिल होने के इच्छुक हो वे
अन्य जानकारी के लिए लिखें: parikalpnaa00@gmail.com:

9 comments:

  1. पडोसी देश श्रीलंका में 23 से 28 मई 2015 तक चलने वाले पंचम अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन की सफलता के लिए अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं!

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  2. अहा बहुत ही सुंदर सचित्र वर्णन । आपको असीम शुभकामनाएं प्रभात जी

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  3. अग्रिम शुभकामनायें
    हर बार की तरह ये सम्मेलन भी बेमिसाल हो

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  4. हार्दिक शुभकामनाएं! हर बार की तरह ये सम्मेलन भी बेमिसाल हो

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  5. अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं, रविन्द्र जी.

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