एक माँ - हवाओं का रुख मोड़ना जानती है, 
खड़ी हो जाती है आंधी-तूफ़ान के आगे कवच सी 
सारथि बन सम्पूर्ण संसार में अपने बच्चों के आगे 
मन्त्रों के अश्व लिए शुभ का यज्ञ करती है  …. 

आसमान में 
जब सतरंगी सपने झिलमिलाते हैं 
तो माँ उनमें से चटक रंग ले आती है
अपने आँचल में बांधकर
फिर अपने बच्चों की आँखों में 
बूंद बूंद  भर देती है 
.... चटकीले सपनों को मकसद बना 
नन्हें कदम डग भरने लगते हैं !
दिन भर फिरकनी की तरह खटती माँ 
थकती नहीं 
चटकीले रंग , मोहक सपने लाना 
कभी भूलती नहीं  ...
कभी मालिश करते वक़्त
कभी जूते पहनाते
कभी कौर खिलाते 
कभी सर सहलाते हुए 
देती जाती है मोहक रंगों की उड़ान !
हकीकत की धरती को 
कभी बाँझ नहीं होने देती
सपनों के बीज लगाती जाती है
आंसुओं से सींचती जाती है ...
माँ ... 
दुआओं के धागे 
हर पल साथ लिए चलती है 
जब भी मन अकुलाता है 
आँचल की गाँठ से जोड़ लेती है
माँ ...
बड़ी प्यारी होती है !!!

रश्मि प्रभा 


Priti Surana (सोशल मिडिया से )

मैंने कितना मना किया था न आपको,..
मत रखो पूरियाँ और सब्जी मेरे साथ,..
मैं सफर में कुछ नहीं खाऊंगी,..
और आपने क्या कहा था,...
चुपचाप रख लो जो दिया है,..
तुम्हे नहीं चाहिए तो दे देना किसी गरीब भूखे या जरूरतमंद को,...
हां मैंने खा ली है
सारी पूरियाँ और सब्जी
और साथ में चुपके से रखी मिठाईयां और नमकीन भी,..
मुझे मिला ही नहीं
कोई मुझसे ज्यादा गरीब
जिसे आपकी ममता और स्नेह से बिछड़ना पड़ा हो,..,.
मुझसे ज्यादा भूखा,.
जिसका पेट
आपकी मीठी सी झिड़कियां
और नमकीन सी डांट खाकर भर जाता,..
और ना मिला
कोई ऐसा जरूरतमंद
जिसे जरूरत हो
आपकी हिदायतों,..नसीहतों..और परवाह की,..
माफ़ करना मुझे,.
मैं विदा होते हुए चुरा लाई हूं
घर के हर कोने से
थोड़ी थोड़ी बिखरी हुई यादें,.
पर छोड़ आई हूं अपना बहुत कुछ आपके आंगन में,..
जैसे मां के आंगन से विदाई के वक्त
बेटी छोड़ आती है
थोड़ा सा अनाज मां के आंचल में,..
जिससे बाबुल की देहरी से नाता हमेशा जुड़ा रहे,..
और
एक आखरी बात,..
आते वक्त मैं जल आई थी
'एक दीया' घर देरासर में,
इस दुआ के साथ
कि आपका घर हमेशा सुखी स्वस्थ और संपन्न रहे,..
और हमारा प्यारा सा रिश्ता भी,..
सुनो ना!
आप डालती रहना शुद्ध घी
अपने स्नेह और विश्वास का
ताकि जलता रहे
एक अखंड दीप दुआओं का
और वैसे ही अखण्ड रहे
हमारा ये प्यार भरा रिश्ता हमेशा हमेशा,..

4 comments:

  1. वाह...वाह...वाह...
    निःशब्द हूँ
    सिर्फ महसूस कर सकती हूँ...
    कर रही हूँ...!!!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

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